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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 27, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

एकीकृत जलागम परियोजना के कार्यान्वयन में अपनाएं आर्थिक मॉडल

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Published: Fri, 27 Sep 2013 07:41 PM (IST)Updated: Fri, 27 Sep 2013 07:42 PM (IST)

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जागरण ब्यूरो, शिमला : मुख्य सचिव एस रॉय ने कहा कि जलागम परियोजनाओं के कार्यान्वयन में विपणन, स्वयं सहायता समूहों की आजीविका के लिए चलाए जा रहे कार्य इत्यादि के विषय में विभिन्न एजेंसियों के साथ तालमेल के अनुसार आर्थिक मॉडल अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के कार्यान्वयन में भू-कटाव, जल संरक्षण को प्रोत्साहन तथा लोगों विशेषकर कृषक समुदाय को आर्थिक रूप से लाभान्वित करने जैसी मूलभूत बातों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। वह शुक्रवार को एकीकृत जलागम प्रबंधन योजना की राज्यस्तरीय नोडल एजेंसी की छठी बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

मुख्य सचिव ने जलागम प्रबंधन योजनाओं की दीर्घावधि सतता पर बल देते हुए कहा कि यह तभी संभव है जब क्षेत्र विशेष में परियोजना के आरंभ होने से पहले पूर्ण योजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि यदि इस प्रकार उत्पादित होने वाले उत्पादों की ब्राडिंग की जाए तो इससे ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिकी और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृषि क्षेत्र की सफलता के लिए जल प्रबंधन आवश्यक है, इसलिए यह आवश्यक है कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करते समय सभी आवश्यक पहलुओं पर विचार किया जाए।

रॉय ने कहा कि हिमाचल प्रदेश केंद्र सरकार की विश्व बैंक पोषित मध्य हिमालय विकास परियोजना से विशेष रूप से लाभान्वित हुआ है। यह परियोजना प्रदेश के 10 जिलों में कार्यान्वित की जा रही है। इसकी सफलता को देखते हुए केंद्र सरकार ने एकीकृत जलागम प्रबंधन परियोजना को प्रदेश में ग्रामीण विकास एजेंसी के माध्यम से आरंभ किया है।

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