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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 18, 2011 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

दहेज संबंधी कानून 498 में संशोधन की मांग

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Published: Mon, 18 Apr 2011 08:54 PM (IST)Updated: Thu, 17 Nov 2011 04:54 PM (IST)

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यमुनानगर, जागरण संवाद केंद्र

युवा शक्ति दल की बैठक सोमवार को कैनाल रेस्ट हाउस में दल के संस्थापक एवं अध्यक्ष विक्रम चौहान की अध्यक्षता में हुई। इसमें दहेज संबंधित कानून 498-ए पर चर्चा की गई। उन्होंने दहेज प्रथा संबंधी बनाए गए इस कानून में संशोधन करने की मांग की।

विक्रम चौहान ने कहा कि इस धारा के कारण पूरे समाज में अशांति फैली हुई है और परिवार टूट रहे हैं। वर्ष 1983 में लागू दहेज विरोधी धारा 498-ए का आज लड़की पक्ष की ओर से बेजा इस्तेमाल किया जा रहा है। बहु का घर छोड़ने का कारण चाहे कोई भी हो, इसका कारण केवल दहेज ही बतलाया जाता है।

महिला आयोग की नजर में सिर्फ बहु ही महिला है, सास व ननद नहीं। नेशनल क्राइम ब्यूरो के 2007 के आंकड़ों के अनुसार 498-ए के तहत 187540 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें से केवल 13247 का अपराध सिद्ध हो सका। एनसीआरबी के अनुसार पिछले दस वर्षो में शादीशुदा पुरुषों में आत्महत्या की प्रवृति तेजी से बढ़ी है। आज देश में ऐसे परिवारों की कमी नहीं है, जिन पर इस कानून की गाज न गिरी हो। पत्नी या बहु के इस धारा के तहत मामला दर्ज कराने के कारण सैकड़ों परिवार बर्बादी के कगार पर पहुंच चुके हैं। विक्रम चौहान ने युवा एकता दल के माध्यम से मांग की कि यदि धारा 498-ए का दुरुपयोग कोई महिला बिना किसी कारणवश ससुराल, रिश्तेदार या पति को परेशान करने के लिए करे तो उसके लिए भी सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए। इससे कोई भी इस कानून का दुरुपयोग करने के बारे में दस बार सोचेगा।

इस मौके पर ललित डोगरा, राजीव, अशोक कुमार, मनमोहन सिंह, दुष्यंत, श्रीकांत, शकुंतला रानी, नीतू, अन्नु रानी सहित अन्य उपस्थित थे।

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