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    उपचार के बाद ही करें आलू की बिजाई : डॉ. सिंह

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    Updated: Mon, 28 Oct 2013 01:05 AM (IST)

    जागरण संवाददाता, कुरुक्षेत्र : सब्जियों में सबसे अहम कहे जाने वाले आलू की दमदार पैदावार को लेकर किसान निरंतर प्रयासरत रहते हैं। इस फसल में सबसे बड़ी समस्या मरोड़िया रोग और अन्य बीमारियां हैं। ये समस्याएं फसल की पैदावार में आधे से भी अधिक किसानों को आर्थिक हानि पहुंचाती हैं। इसके लिए जरुरी है कि किसान उपचार के बाद ही आलू के बीज की बिजाई करें।

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    यह जानकारी पूर्व वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एवं आलू विशेषज्ञ डॉ. सीबी सिंह ने दी। विशेषज्ञ ने बताया कि किसान को उपचारित बीज की ही बिजाई करनी चाहिए। इन दिनों आलू की बिजाई का सीजन जोरों पर है। आलू के बीज की इमीसान-छह और बोरिक एसिड से उपचार करने के बाद ही बुआई करनी चाहिए, जिससे बाद में समस्या ही न हो। बढ़ते प्याज की कीमतों को लेकर किसान आलू की खेती अधिक से अधिक कर रहे हैं। डॉ. सिंह ने बताया कि जो किसान पहले ही बिजाई कर चुके हैं वे अपनी फसल को विषाणु से बचाएं। इससे पत्ते टेढे़-मेढ़े हो जाते हैं। इसका कारण मरोडिया रोग है, इससे बचाने के लिए शुरु में ही फंजीसाईड व कीटनाशक दवाओं का मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा आलू में काला कोढ़, मरोड़ियां फंगस आदि समस्या हो जाती हैं। इसके साथ हरी व छोटी सुंडिया भी आलू की खेती में समस्या का मुख्य कारण हैं। इससे बचाव के लिए कीटनाशक दवाओं का प्रयोग करना चाहिए। पूर्व कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि आलू 22 से 30 डिग्री बिजाई के लिए व बढ़वार के लिए 18 से 22 डिग्री का तापमान चाहिए। यह फसल फरवरी में तैयार हो जाती है। वहीं डॉ. सीबी सिंह ने बताया कि आलू की खेती में खरपतरवार पर नियंत्रण न होने से 40 से 50 प्रतिशत फीसदी असर पड़ जाता है।

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