विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 08, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बॉक्सर मनोज ने कन्हैया को लिया आड़े हाथ, नेताओं पर उठाए सवाल

By Sunil Kumar JhaEdited By:
Published: Tue, 08 Mar 2016 01:33 PM (IST)Updated: Thu, 10 Mar 2016 01:16 PM (IST)

अंतरराष्‍ट्रीय मुक्‍केबाज मनाेज कुमार भी जेएनयू विवाद में कूद पड़े हैं। मनाेज ने छात्र नेता कन्‍हैया कुमार को आड़े हाथ ...और पढ़ें

News Article Hero Image

जागरण संवाददाता, कैथल। अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर मनोज कुमार ने जेएनयू प्रकरण में छात्र नेता कन्हैया कुमार को आड़े हाथों लिया है। मनोज ने उसका समर्थन करने वाले नेताओं पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल साइट फेसबुक पर लिखा, ' रामचंद्र जी कह गए सिया से, ऐसा कलयुग आएगा, देशभक्त सुनेंगे ताने-तुनके, देशद्रोही हीरो बन जाएगा, टीवी पे लाइव भाषण सुनाएगा।'

मनोज ने लिखा है, मैं पहले इस विवाद पर बोलने के लिए उलझन में था, लेकिन फिर दिल ने कहा कि जब देश की बर्बादी के नारे लगाने वाले जोर-शोर से बोल सकते हैं, भाषण झाड़ सकते हैं तो फिर हम देश के लिए खेलने वाले खिलाड़ी चुप रह गए तो ये भी गलत होगा।'

पढ़ें : हरियाणा में विधानसभा भंग कर राष्ट्रपति शासन लगे : कांग्रेस

उन्होंने अपनी टिप्पणी में लिखा है, वह देख रहे हैं कि एक शख्स जो कल तक देश की बर्बादी के नारे लगाने वालों के साथ खड़ा था या यूं कहें उनका नेता था, उसी शख्स को आज कुछ लोग हीरो बनाने पर तुले हुए हैं। क्या हमारी राजनीति इतनी गिर चुकी है। बहुत से नेता उसे बधाई दे रहे थे, मानो वह देशद्रोही नहीं, देश प्रेम के आरोप में जेल गया हो।'

पढ़ें : खेमका ने अब केंद्र सरकार की स्कीम 'उदय' पर उठाए सवाल

मनोज ने आगे लिखा है, कल तक यही नेता कह रहे थे कि वह गरीब है, उसका पिता लकवे से ग्रस्त है, परिवार के पास आय के साधन नहीं हैं। मात्र तीन हजार महीने में घर का गुजारा हो रहा है। 29 साल का लड़का अपने गरीब मां-बाप का सहारा बनने की बजाय ब्रांडेड कपड़े पहन कर फॉच्यूर्नर गाड़ी में जेल से निकलता है। फिर बड़े-बड़े भाषण देगा तो क्या गरीबी दूर हो जाएगी।द्ध

पढ़ें : एक और पाकिस्तानी मुन्नी के लिए बीएसएफ बनी बजरंगी भाईजान

अर्जुन अवार्डी बॉक्सर ने कहा कि तथाकथित बुद्धिजीवी लोग असली मुद्दे से ऐसे भटका देते हैं कि साधारण लोग समझ ही नहीं पाते कि बात आखिर थी क्या। वे सब से गुजारिश करते हैं कि इस बार ऐसा न होने दें। इस सवाल को उठाते रहें कि देशद्रोहियों का साथ देने वालों के साथ क्यों ये लोग, ये राजनेता खड़े हो जाते हैं। आप किसके साथ हैं ये आपको तय करना है, लेकिन मैं अपने देश के साथ हूं, अपने हिंदुस्तान के साथ हूँ, अपने तिरंगे के साथ हूं।