यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 07, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
खेमका ने अब केंद्र सरकार की स्कीम 'उदय' पर उठाए सवाल
हरियाणा के वरिष्ठ आइएएस अधिकारी डा. अशोक खेमका ने अब केंद्र सरकार की 'उदय' स्कीम पर सवाल उठाए हैं। खेमका ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा के वरिष्ठ आइएएस अधिकारी डा. अशोक खेमका ने अब केंद्र सरकार की 'उदय' स्कीम पर सवाल उठा दिए हैं। हरियाणा की बिजली कंपनियों का करीब 26 हजार करोड़ रुपये का कर्ज सरकार द्वारा अपने ऊपर लिए जाने के बाद खेमका ने 'उदय' योजना की उपयोगिता पर संदेह जताया है।
उन्होंने ट्विट कर पूछा है कि इस स्कीम से बिजली कंपनियों को उत्पादन और वितरण से हाेने वाला नुकसान कैसे कम होगा। उन्होंने अपने ट्विट में लिखा है कि क्या बिजली कंपनियों के भ्रष्टाचार और बिजली चोरी का नुकसान ईमानदारी से टैक्स का भुगतान करने वालों को नहीं भुगतना पड़ता है?
हरियाणा सरकार के कई अधिकारी पहले से ही 'उदय' स्कीम को लागू करने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन कोई खुलकर सामने नहीं आ रहा था। राज्य पहले से 65 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में है। अब सरकार बिजली कंपनियों का 25 हजार 950 करोड़ का कर्ज चुकाने के लिए नए कर्ज लेगी। ऐसे में प्रदेश पर कर्ज की राशि बढ़कर 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी।
मंत्रिमंडल में 'उदय' स्कीम को लागू करने से पहले वित्त विभाग के तत्कालीन अधिकारियों ने बिजली कंपनियों का कर्ज नहीं वहन करने का सुझाव सरकार को दिया था। चूंकि, यह योजना केंद्र की है और अधिकतर भाजपा शासित राज्य इसे लागू कर रहे हैैं तो मनोहर सरकार भी अपने को पीछे नहीं रख पाई।
हरियाणा की बिजली कंपनियों का कर्ज 34 हजार 600 करोड़ रुपये का है। इसमें से 25 हजार 950 करोड़ रुपये का कर्ज तो सरकार उतारने पर राजी हो गई है, लेकिन बाकी कर्ज कैसे उतरेगा, बिजली कंपनियां अभी तक इसकी कार्ययोजना तैयार नहीं कर पाई हैैं। अलबत्ता, बिजली की चोरी व लाइन लॉस कम कर यह कर्ज उतारने का दावा जरूर किया जाता रहा है मगर अभी तक इसका रोडमैप तैयार नहीं हुआ है। बिजली निगमों का लाइन लॉस करीब 35 प्रतिशत तक पहुंचा हुआ है।
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'उदय' योजना नहीं देती बिजली के रेट और चोरी रोकने की गारंटी
केंद्र सरकार की उज्ज्वल डिस्कॉम्स एश्योरेंस योजना (उदय) के तहत अगले तीन वर्षों में बिजली कंपनियों के कर्ज के बोझ को कम करना है और बिजली की कीमतों एवं हानियों को 15 प्रतिशत तक कम पर लाना है। इसके अलावा बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार इस योजना का अहम पहलू है। योजना के लागू होने के बावजूद हरियाणा में बिजली के रेट कम होंगे और चोरी रुक जाएगी, इसकी गारंटी अभी तक कंपनियां खुद लेने को तैयार नहीं हुई हैैं।
