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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 24, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कुश्ती के दीवाने मन्ना डे ऐसे बने अनमोल गायक

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Published: Thu, 24 Oct 2013 08:58 AM (IST)Updated: Thu, 24 Oct 2013 08:59 AM (IST)

अगर आपसे पूछा जाए कि मन्ना डे का पहला प्यार क्या था तो आप निश्चित तौर पर संगीत का नाम ...और पढ़ें

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अगर आपसे पूछा जाए कि मन्ना डे का पहला प्यार क्या था तो आप निश्चित तौर पर संगीत का नाम लेंगे। लेकिन संगीत से पहले भी उनकी दीवानगी कुश्ती को लेकर थी। कुश्ती के साथ वे फुटबॉल के भी शौकीन थे। कम लोग जानते हैं कि मन्ना डे संगीत के क्षेत्र में आने से पहले इस बात को लेकर लंबे समय तक दुविधा में रहे कि वे वकील बनें या गायक। आखिरकार अपने चाचा कृष्ण चंद्र डे से प्रभावित होकर उन्होंने तय किया कि वे गायक ही बनेंगे।

तस्वीरों में देखें, मन्ना डे का सफर

यह दिलचस्प खुलासे मन्ना डे की ऑटोबायोग्राफी 'मेमरीज कम अलाइव' में हुए थे। चूंकि मन्ना अपने चाचा केसी डे से प्रभावित होकर ही गायन के क्षेत्र में आए थे इसलिए चाचा को ही उन्होंने अपना उस्ताद बनाया। मन्ना बुलंदियों तक पहुंचने का श्रेय अपने चाचा को ही देते थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था, 'मेरे चाचा कृष्ण चंद्र डे अपने समय के एक माने हुए संगीतकार थे इसलिए हमारे घर संगीत जगत के बड़े-बड़े लोगों का आना-जाना लगा रहता था। कम उम्र में ही चाचा की आंखों की रोशनी चली जाने की वजह अक्सर मैं उनके साथ ही रहता था।'

मन्ना डे के दस सबसे बेहतरीन गीत

मन्ना को मुंबई में पांव जमाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने बताया था कि 1943 में फिल्म तमन्ना में सुरैया से साथ गाने का मौका मिलने के बाद भी उन्होंने काम के लिए दर-दर की ठोकरे खानी पड़ी। काफी संघर्ष के बाद उन्हें दोबारा काम मिलने लगा। वे बताते थे, 'पहली फिल्म के बाद लंबे समय तक कोई काम नहीं मिला तो उनके मन में कई बार कोलकाता लौट जाने का ख्याल आया। नाउम्मीदी और मुफ़लिसी के उस दौर में मैंने मशाल फिल्म में गाया और मेरा गीत 'ऊपर गगन विशाल' हिट हो गया और उसके बाद मुझें धीरे-धीरे काम मिलने लगा।

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