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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 25, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

यूपी चुनाव: सीएम की कुर्सी पर बैठने वाले का हमेशा रहा है इन टोटकों पर अटूट विश्वास

By Rahul SharmaEdited By:
Published: Wed, 25 Jan 2017 04:16 PM (GMT+05:30)Updated: Wed, 25 Jan 2017 08:00 PM (GMT+05:30)

बीएसपी और समाजवादी पार्टी बेशक चिर प्रतिद्वंदी हो और हमेशा एक दूसरे की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हों लेकिन ...और पढ़ें

यूपी चुनाव: सीएम की कुर्सी पर बैठने वाले का हमेशा रहा है इन टोटकों पर अटूट विश्वास
यूपी चुनाव: सीएम की कुर्सी पर बैठने वाले का हमेशा रहा है इन टोटकों पर अटूट विश्वास

नई दिल्ली,राहुल शर्मा। उत्तर प्रदेश चुनाव का बिगुल बज चुका है और तमाम राजनीतिक दल अपने-अपने तरीकों से चुनाव प्रचार में जुट गए हैं। देश के सबसे बड़े सूबे की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए राजनीतिक दल कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। इसी के मद्देनजर ये जानना आपके लिए दिलचस्प होगा कि उत्तर प्रदेश चुनाव की इस दौड़ में राजनेता सिर्फ चुनाव प्रचार पर ही नहीं बल्कि अपने टोने-टोटकोंं पर भी काफी यकीन करते हैं।

बीएसपी और समाजवादी पार्टी बेशक चिर प्रतिद्वंदी हों और हमेशा एक दूसरे की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हों लेकिन बात अगर टोटकों की हो तो दोनों की नीतियों में कोई अतंर नहीं दिखता है। इतिहास गवाह है राज्य में जो भी सीएम बना है उसका टोटकों के साथ अपना एक अलग ही खट्टा-मीठा रिश्ता रहा है। आज हम आपको अपनी खबर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के ऐसे ही टोटका कनेक्शन बताने जा रहे हैं जिनके बारे में एक बार तो आपको जरूर जानना चाहिए।

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सीएम नहीं करते नोएडा का दौरा

सबसे पहले बात करते हैं नोएडा के डर की। जी हां, यूपी का कोई भी मुख्यमंत्री कभी नोएडा नहीं जाता इसका सबसे बड़ा कारण है वो बात जिससे सब डरते हैं कहा जाता है कि सीएम रहते अगर कोई नेता नोएडा चला जाए तो उसकी कुर्सी नहीं बचती। इसके चलते उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी कई बार नोएडा जाने से बचते रहे। दरअसल 1988 में वीरबहादुर सिंह ने नोएडा से लौटते हुए अपनी कुर्सी गंवा दी जिसके बाद यह टोटका शुरू हो गया।

-1989 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी एक पार्क का उद्घाटन करने नोएडा के सेक्टर-11 गए और तुरंत बाद उनकी सरकार गिर गई।

-1998 में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह नोएडा के एक कार्यक्रम में पहुंचे और इसके बाद उनकी कुर्सी चली गई।

-2004 में मुलायम सिंह यादव एक स्कूल के उद्घाटन के लिए गए और फिर वे दोबारा कुर्सी पर नहीं लौटे।

-इसके बाद 2011 में मायावती फिर से नोएडा आई, लेकिन इसके बाद हुए चुनाव में उनकी सत्ता चली गई।

पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का पिंक कनेक्शन

इस कड़ी में अगली बात पूर्व मुख्यमंत्री और बीएसपी प्रमुख मायावती की करते हैं। मायावाती हमेशा खुशी के मौके पर सिर्फ पिंक कपड़े पहनती हैं। लोग इसे शुभ-अशुभ से जोड़ते हैं लेकिन वह इसका मतलब कुछ और बताती हैं। इस संबंध में बसपा सुप्रीमो मायावती का कहना है, ''ये मेरा अपना पिंक कलर क्या है कि वो थोड़ा सा कुछ चमकता है। उज्ज्वल सा है। उसमें लाइट ज्यादा आती है। मैं अपने समाज को पिंक कलर की तरह उसको खुशहाल बनाना चाहती हूं। उनकी जिंदगी में चाहती हूं कि जैसा पिंक उज्ज्वल है...खिलता रहता है...मेरा समाज मतलब जो सर्व समाज है, वह भी खिले। ''

पश्चिमी यूपी में चुनाव पहले लेकिन प्रचार की शुरुआत सुल्तानपुर से

अखिलेश यादव ने अपना चुनाव प्रचार मंगलवार को सुल्तानपुर से शुरू किया जहां पांचवें चरण में चुनाव है। जानकार कहते हैं कि पहले चरण में चुनाव पश्चिमी यूपी में है लेकिन ज्योतिष के 'दिशा शूल' नियम के मुताबिक मंगलवार को शुभ काम के लिए पश्चिम दिशा में यात्रा नहीं करते। ये भी कहते हैं कि 2012 में यहीं से प्रचार शुरू कर अखिलेश सत्ता में आए। लिहाजा मंगलवार को अपनी पहली चुनावी रैली यहीं की। भले ही चुनाव यहां पांचवें चरण में हो। पांचवें चरण में चुनाव 27 फरवरी को होने हैं जबकि पहले चरण में चुनाव 11 फरवरी को ही होने हैं।

आगरा में छिपा सपा का टोटका

उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के लिए समाजवादी पार्टी के पास एक टोटका आगरा की जमीन में भी छिपा है। जानकार कहते हैं कि आगरा में किया गया यह टोटका सपा के लिए सदैव फलदायी रहा है।समाजवादी पार्टी का यह अनुभव है कि जब-जब पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी आगरा में हुई है, तब-तब सत्ता मिली है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पूर्व राष्ट्रीय कार्यकारिणी या अधिवेशन ने सपा की साइकिल को जमकर दौड़ाया है। यह बात अलग है कि आगरा में सपा के प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत पाते हैं, लेकिन सरकार तो बनती ही है। इसी कारण राष्ट्रीय अधिवेशन को टोटका कहा जाने लगा।

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