यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 12, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
MCD चुनाव: मोबाइल SMS के जरिए वोटरों को लुभाने की जुगत, बोर हो रहे लोग
बहुत से उम्मीदवार अलग-अलग स्त्रोतों से क्षेत्र के मतदाताओं के मोबाइल नंबरों की सूची लेकर उन पर हर रोज अपने पक्ष में एसएमएस भिजवा रहे हैं।

नई दिल्ली [संजीव गुप्ता] । जान ना पहचान...मैं तेरा मेहमान... यह पंक्ति नगर निगम चुनाव के इस माहौल में आजकल खूब चरितार्थ हो रही है। विभिन्न राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में डटे प्रत्याशी मतदाताओं के मोबाइल पर शुभकामनाओं व बधाई के एसएमएस भेज रहे हैं।
यह एसएमएस भेजने से पहले यह भी नहीं जांचा जा रहा कि मतदाता है कहां का। ऐसे में हो क्या रहा है कि मतदाता रोहिणी में रहता है, जबकि एसएमएस उसके पास नवादा से आ रहा है।
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दरअसल, चुनाव खर्च की सीमा 5.5 लाख तय होने और उस पर ऑब्जर्वर की पूरी निगाह होने के कारण ज्यादातर उम्मीदवार चुनाव प्रचार भी सोच-समझ ही कर रहे हैं। उनकी कोशिश कम खर्च में अधिकाधिक लोगों तक पहुंचने की है।
इसी कड़ी में बहुत से उम्मीदवार अलग-अलग स्त्रोतों से क्षेत्र के मतदाताओं के मोबाइल नंबरों की सूची लेकर उन पर हर रोज अपने पक्ष में एसएमएस भिजवा रहे हैं।
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एसएमएस में खुद के लिए वोट मांगने की अपील सहित नवरात्र, महावीर जयंती, हनुमान जयंती की बधाई इत्यादि संदेश शामिल रहते हैं। कुछ उम्मीदवारों के यहां से तो इन मतदाताओं को फोन करके आमंत्रण भी दिया जा रहा है कि फलां जगह फलां प्रत्याशी का कार्यक्रम है, आप सादर आमंत्रित हैं।
इस तरह के अवांछित संदेशों और फोन कॉल से दिल्लीवासी इन दिनों खासे परेशान हैं। समस्या इसलिए भी हो रही है कि मतदाता कहीं का होता है, जबकि उसके पास एसएमएस कहीं के प्रत्याशी का पहुंचता है।
ऐसे में न तो उम्मीदवार के लिए उसकी उपयोगिता होती है और मतदाता भी बिना बात ही परेशान होता है, वह अलग।
एक कामकाजी महिला मंजू सिंघल ने बताया कि कई बार जब इस तरह का फोन आता है तो वे मीटिंग में होती हैं। नया नंबर देखकर फोन उठा लेती हैं, लेकिन सुनने पर बहुत गुस्सा आता है।
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एमए की छात्रा शिवांगी ने बताया कि दिन भर ऐसे एसएमएस आते रहते हैं। गुस्सा तब ज्यादा आता है, जब वो एसएमएस कहीं और के होते हैं।
वहीं एक प्रत्याशी ने बताया कि जिन स्त्रोतों से वे मोबाइल नंबरों की लिस्ट लेते हैं, उनका दावा तो यही होता है कि सभी नंबर हमारे वार्ड के हैं।
अब इन नंबरों की जांच करें भी कैसे! उधर, राज्य निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि परेशान मतदाता चाहें तो आयोग के हेल्पलाइन नंबर पर इस संबंध में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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