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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 26, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

OROP के लिए देश के सैनिक सड़क पर उतरने को मजबूरः सतबीर सिंह

By JP YadavEdited By:
Published: Wed, 26 Aug 2015 09:12 AM (IST)Updated: Wed, 26 Aug 2015 09:17 PM (IST)

जनरल सतबीर सिंह (सेवानिवृत्त) ने बुधवार को कहा है कि 'वन रैंक वन पेंशन' के लिए देश के सैनिकों को ...और पढ़ें

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नई दिल्ली। जनरल सतबीर सिंह (सेवानिवृत्त) ने बुधवार को कहा है कि 'वन रैंक वन पेंशन' के लिए देश के सैनिकों को सड़क पर उतरने को मजबूर होना पड़ रहा है, ये देश का दुर्भाग्य है। उनके मुताबिक, इस मामले पर सरकार के साथ बैठक हुई थी, लेकिन इस संबंध में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है।

इस बीच, 'वन रैंक वन पेंशन' को लेकर पूर्व सैनिकों का जंतर मंतर पर चल रहा आंदोलन असर दिखाने लगा है। एक दिन पहले रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस सिलसिले में मुलाकात की थी। वह आज भी इस सिलसिले में मोदी से मुलाकात करेंगे।

OROP: पूर्व फौजियों के समर्थन में वीके सिंह की बेटी भी उतरीं

ऐसे में अब उम्मीद जगने लगी है कि नरेंद्र मोदी 28 अगस्त को वन रैंक वन पेंशन का एलान कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके लिए कई मंत्रालयों से बात की और इस पर जल्द फैसला लेने का निर्णय लिया है। हालांकि, वन रैंक वन पेंशन की घोषणा को लेकर अबतक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

अनशन पर बैठे हवलदार मेजर सिंह की भी तबीतय बिगड़ी, अस्पताल जाने से किया इनकार

वहीं, दूसरी तरफ दिल्ली में जंतर मंतर पर पूर्व सैनिकों का आंदोलन तेजी पकड़ रहा है। दो दिन पहले तबीयत खराब होने के चलते कर्नल पुष्पेंद्र सिंह को अस्पताल में भरती करवाया गया, तो कल हवलदार मेजर सिंह को अस्पताल में भर्ती करवाने के लिए एबुलेंस जंतर मंतर पर पहुंची थी, हालांकि उन्होंने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया था।

गौरतलब है कि पूर्व सैनिक उदय सिंह रावत और मेजर प्यारे चांद के साथ बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक जंतर मंतर पर बैठे हैं। पूर्व सैनिक वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर दो महीने से भी ज्यादा वक्त से आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन में धीरे- धीरे कई लोग जुड़ रहे हैं।

इसमें केंद्रीय मंत्री वीके सिंह की बेटी मृणालिनी भी रविवार को शामिल हुईं और प्रधानमंत्री से अपील की थी कि वह उनकी मांगों पर ध्यान दें।