यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 23, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
यह लो, अब गिरते रुपये का असर क्रिकेट पर भी पड़ा
रुपया गिर रहा है और हर जगह, हर स्तर पर चीजों को प्रभावित कर रहा है। यह सिर्फ अर्थजगत और ...और पढ़ें

नई दिल्ली। रुपया गिर रहा है और हर जगह, हर स्तर पर चीजों को प्रभावित कर रहा है। यह सिर्फ अर्थजगत और भारत की मौजूदा स्थिति पर असर नहीं डाल रहा बल्कि अब इसने हमारे क्रिकेटरों की जेब भी हल्की करनी शुरू कर दी है। कैसे? आइए जानते हैं..
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रुपया 3 मई के डॉलर के मुकाबले 54 रुपये के बाद, 23 अगस्त को 65 रुपये के स्तर तक फिसल गया। दरअसल, खबरों के मुताबिक गिरते हुए रुपये का सीधा असर आइपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) पर पड़ने लगा है। इससे इस मालामाल लीग के विदेशी खिलाड़ियों की कमाई पर तो कोई असर नहीं पड़ा है लेकिन इसकी वजह से भारतीय खिलाड़ियों की जेब जरूर हल्की होना शुरू हो गई है। यहां जितना दोष डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती फितरत है उतना ही दोष इस टूर्नामेंट के दो दर्जों वाली भुगतान प्रक्रिया का भी है। मामला यह है कि, भारतीय खिलाड़ियों को जिस 'तीन वर्षीय लॉक्ड इन रेट' प्रक्रिया के तहत भुगतान किया जा रहा था, उस समय रुपया इतना ढीला नहीं पड़ा था। उस वक्त डॉलर की कीमत 46 रुपये थी और इस भुगतान प्रक्रिया की वजह से अब उन्हें तीन साल के लिए इसी रेट पर ही उनका वेतन चुकाया जाएगा जबकि विदेशी खिलाड़ियों को फ्लोटिंग रेट पॉलिसी के हिसाब से भुगतान किया जा रहा था जिस वजह से उन पर इसका कोई असर नहीं पड़ने वाला।
इस गिरावट का सबसे बड़ा असर आइपीएल में खेलने वाले गौतम गंभीर और एमएस धौनी जैसे महंगे भारतीय खिलाड़ियों पर पड़ेगा जिन्हें डॉलर के रेट और आइपीएल के रेट में 40 प्रतिशत के उस अंतर की वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। आइपीएल की भुगतान प्रक्रिया के हिसाब से खिलाड़ियों को चार हिस्सों में भुगतान किया जाता है। 15 प्रतिशत सीजन शुरू होने से पहले, 50 प्रतिशत 1 मई से पहले, 15 प्रतिशत चैंपियंस लीग टी20 से पहले और 20 प्रतिशत 1 नवंबर से पहले। इन आंकड़ों के हिसाब से खिलाड़ियों को तकरीबन 35 प्रतिशत वेतन का भुगतान गिरे हुए रुपये के हिसाब से किया जा सकता है।
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