कवि चंदा झा के कृतित्व पर हुई चर्चा
सहरसा। क्षेत्र के बड़गांव गांव के प्रख्यात कविवर चंदा झा के अवतरण तिथि पर गुरूवार को गांव में ही संग
सहरसा। क्षेत्र के बड़गांव गांव के प्रख्यात कविवर चंदा झा के अवतरण तिथि पर गुरूवार को गांव में ही संगोष्ठी आयोजित की गयी। कार्यक्रम के शुरूआत में ग्यारह वैदिकों द्वारा स्तुति वाचन व दीप प्रज्जवलित कर किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता ओंकार नाथ झा व संचालन चन्द्रशेखर झा ने की।
कार्यक्रम में उपस्थित डा. तारानन्द वियोगी ने कविवर चंदा झा के जन्मस्थल बड़गांव की विशेषता पर चर्चा करते हुए कहा कि उनके जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कविवर चंदा झा को मैथिली में आधुनिक साहित्य का प्रवर्तक माना गया है। वहीं प्रो. अरविन्द मिश्र ने कविवर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। डा. महेन्द्र झा कविवर के मैथिली साहित्य में योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि कविवर चंदा झा ने ही पहली बार मिथिला भाषा में रामायण की रचना की। कविवर द्वारा रचित कृति पुरूष परिक्षा, अहिल्या चरित्र आदि की रचना कर मैथिली साहित्य को एक नया आयाम दिया गया। मौके पर डा. कुलानन्द झा, विनय चौधरी, अरूणाम सौरभ, केपी यादव, पी नेदन, हरेराम मिश्र, अविनाश खां, राज ठाकुर, भीमशंकर झा, मुकेश कुमार मानस, सचिदानन्द झा, राघवेन्द्र झा सहित दर्जनों बुद्धजीविगण उपस्थित थे।
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