यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 02, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
थाने को बताया था कि घर खाली है, चोर उड़ा ले गए सामान
पटना में एक घर में अक्टूबर में चोरी हुई थी। पुलिस ने कहा था कि अगली बार सूचना देकर कहीं ...और पढ़ें

पटना [प्रशांत कुमार]। बस लिखा हुआ दिखता है कि 'पटना पुलिस आपकी सेवा में तत्पर है।' तत्परता दिखती नहीं। हद तो तब हो गई कि जानकारी होने के बाद भी पुलिस चोरों से एक अधिवक्ता के घर का सामान नहीं बचा सकी। चोरों ने कदमकुआं थाना क्षेत्र में अनोखी वारदात कर पुलिस के दावों और कार्यशैली की पोल खोलकर रख दी।
अक्टूबर में कदमकुआं थाना क्षेत्र में रहने वाले अधिवक्ता के मकान में अक्टूबर में चोरी हुई थी। उस समय पुलिस ने कहा था कि अगली बार घर बंद कर जाएं तो थाने को सूचित कर दें। वकील साहब इस बार बाहर जाने से पहले कदमकुआं थाने को लिखित रूप से सूचित कर गए कि पांच दिन घर बंद रहेगा। पुलिस एक दिन भी नहीं गई, लेकिन चोरों को इसकी भनक लग गई। चोर अधिवक्ता के घर से दो लाख नकद और एक लाख का सामान उड़ा ले गए।
टाउन डीएसपी कैलाश प्रसाद का दावा है कि सूचना मिलने के बाद इलाके में पुलिस की गश्ती बढ़ा दी गई थी, लेकिन घर को देखने से साफ जाहिर होता है कि चोरों को वारदात करने का पूरा वक्त मिला। उन्होंने इत्मीनान से मकान का कोना-कोना खंगाल डाला और दो लाख रुपये नकदी के साथ लाखों रुपयों के सामान उड़ा ले गए।
राजेंद्र नगर रोड नंबर तीन में हुई वारदात
राजेंद्र नगर रोड नंबर तीन में डॉ. शालीग्राम प्रसाद का दो मंजिला मकान है। उनकी मृत्यु के बाद ऊपरी मंजिल में उनकी पत्नी माला प्रसाद और निचले फ्लोर पर भाई रतन कुमार रहते हैं। रतन पेशे से अधिवक्ता हैं। 30 जून को घरवाले लौटकर आए, तब घर में चोरी होने की जानकारी मिली। मेन गेट से लेकर अंदर के सभी बंद कमरों के ताले टूटे हुए थे। चोरों ने जिसकी चाबी मिली, वह लॉक खोल दिया और जिस अलमारी की चाबी नहीं मिली, उसे तोड़ दिया।
26 जून को दी थी थाने में सूचना
अधिवक्ता ने कदमकुआं थानाध्यक्ष को संबोधित करते हुए 26 जून को थाने में लिखित शिकायत दी सूचना थी। पत्र में लिखा हैं कि आपके निर्देशानुसार जानकारी दे रहा हूं कि मैं 26 से 30 जून तक शहर से बाहर रहूंगा। अनुरोध है कि मेरी अनुपस्थिति में घर पर निगरानी रखी जाए।
पहले भी हो चुकी है चोरी
अधिवक्ता सपरिवार 12 अक्टूबर 2016 को हैदराबाद गए थे और उनकी भाभी दिल्ली गई थीं। दोनों परिवारों की गैरमौजूदगी के दौरान मकान के दूसरे तल पर रहने वाली उनकी भाभी के यहां चोरों ने धावा बोला था और नकदी सहित सामान उड़ा ले गए थे। जब 18 अक्टूबर को रतन लौटे तो घटना की जानकारी मिली।
इससे पहले सात दिसंबर 2005 को उनके घर चोरी हो चुकी है। परिवारवालों की मानें तो अक्टूबर और हाल में हुई चोरी की घटनाओं में समानता है। पिछले साल घटना के बाद थानाध्यक्ष ने घर खाली छोड़कर जाने से पहले थाने में लिखित सूचना देने को कहा था।
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एफएसएल की टीम ने लिए फिंगर प्रिंट
डीएसपी ने बताया कि वारदात की सूचना मिलने के बाद एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लैब) की टीम ने अलमारी और दरवाजों पर से फिंगर प्रिंट लिए हैं। जांच में डॉग स्क्वॉयड की भी मदद ली गई है। चोरों की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है। परिवारवालों का कहना है कि पिछले साल चोरी के बाद भी पुलिस ने इसी तरह जांच कराई थी, लेकिन नतीजा सिफर रहा।