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    बिहार में बाढ़ का संकट गहराया, 49 प्रखंडों की 18 लाख आबादी प्रभावित

    By Kajal KumariEdited By:
    Updated: Fri, 29 Jul 2016 07:40 PM (IST)

    बिहार में बाढ की विभीषिका से हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। विभिन्न नदियों के तटबंधों के टूटने से बाढ से प्रभावित जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

    बिहार में बाढ़ का संकट गहराया, 49 प्रखंडों की 18 लाख आबादी प्रभावित

    पटना [जेएनएन]। बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। कटिहार में ग्रामीण गंगा और महानंदा की दोहरी मार से परेशान हैं। कटिहार के कदवा में ग्रामीणों ने महानंदा नदी का तटबंध काट दिया, जिससे सुबह से तबाही का आलम है। गोपालगंज में गंडक के मुख्य तटबंध में एक किलोमीटर तक दरार पड़ जाने से बाढ़ की विभीषिका और गहरा गई है।

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    सूबे के 49 प्रखंडों की 18 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हो चुकी है। गंभीर रूप से प्रभावित जिलों की संख्या 10 हो गई है। शुक्रवार तक बाढ़ के कारण 22 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर अधिकारियों को राहत व बचाव में तेजी लाने के निर्देश दिए। पूर्णिया में उन्होंने बाढ़ के हालात की समीक्षा भी की।

    कटिहार में तटबंध काटा

    सीमांचल में बाढ़ की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। कटिहार जिले के लोग गंगा और महानंदा नदियों की दोहरी मार से परेशान हैं। बाढ़ के पानी से परेशान हजारों ग्रामीणों ने कल देर शाम कदवा प्रखंड के बरहैया परती गांव के समीप महानंदा नदी के तटबंध को काट दिया। इस कारण तटबंध की दूसरी ओर हाहाकार मच गया है।

    पूरा इलाका जलमग्न

    महानंदा नदी के तटबंध को काटे जाने से करीब तीन लाख आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हो गई है। महानंदा के दाएं तटबंध को बुधवार की देर शाम तोड़े जाने के बाद आसपास के गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग की टीम हालात पर लगातार नजर रखे हुए रही है। जलजनित रोगों की आशंका से निपटने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में सौ डॉक्टरों की टीम को तैनात कर दिया गया है।

    नदी का यह तटबंध पूर्णिया कमिश्नरी में 335 किलोमीटर लंबा है। इसका करीब 135 किमी हिस्सा कटिहार जिले में पड़ता है।

    गोपालगंज में गंडक तटबंध में दरार

    गुरुवार की सुबह गोपालगंज जिले में गंडक के मुख्य तटबंध में कुचायकोट प्रखंड के सिपाया के पास एक किलोमीटर की लंबाई में दरार आ गई। इससे निकट ही अवस्थित कृषि विज्ञान केंद्र और राजकीय पॉलीटेक्निक जलमग्न हो गए हैं। जलस्तर तेजी से बढऩे से प्रभावित इलाकों से लोगों का पलायन शुरू हो गया है।

    सुपौल में तटबंध की मरम्मत को लेकर तनाव

    सुपौल में कुनौली बार्डर के पास क्षतिग्र्रस्त सीमा सुरक्षा बांध की मरम्मत का विरोध करते हुए नेपाली नागरिकों ने अचानक पथराव कर दिया जिससे सशस्त्र सीमा बल के जवानों सहित कई लोग घायल हो गए। हालात के मद्देनजर बांध की मरम्मत रोक दी गई। इससे विभिन्न प्रखंडों में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है।

    कई जगह एनडीआरएफ-एसडीआरएफ तैनात

    कटिहार, किशनगंज, पूर्णिया एवं अररिया जिले में हालात बिगडऩे की सूचना पर एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ के अतिरिक्त जवान भेजे गए हैं। यहां प्रभावित इलाकों के लिए भोजन के 30 हजार पैकेट भेजे गए हैं। सुपौल, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, दरभंगा एवं पटना में एनडीआरएफ की अलग-अलग टीमें तैनात हैं। खगडिय़ा, सीतामढ़ी, पूर्णियां, भागलपुर, मधुबनी, मधेपुरा को एसडीआरएफ के हवाले कर दिया गया है।

    जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी

    सीमांचल में कोसी के जलस्तर में कमी के संकेत हैं जबकि खगडिय़ा के बलतारा में कोसी में उफान है। नदी का जलस्तर यहां प्रति घंटा आधा सेमी की रफ्तार से बढ़ रहा है। कोसी खगडिय़ा केबलतारा और कटिहार के कुरसेला में खतरे के निशान से ऊपर है। बागमती खगडिय़ा के संतोष स्लूईस के पास निरंतर बढ़ रही है। वैसे कोसी के तटबंधों के बीच पानी का स्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है।

    दरभंगा में भी कोसी के जलस्तर में कमी हुई है। कमला बलान का जलस्तर मधुबनी में स्थिर बना हुआ है। शिवहर में बागमती के जलस्तर में कमी आने के संकेत हैं। बगहा में गंडक का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंच गया है।

    सहरसा में 200 घर कटाव की जद में

    सहरसा में अब तक 200 घरग कोसी के कटाव की भेंट चढ़ चुके हैं। डीएम ने 84 घरों के कटने की पुष्टि की है। मधेपुरा के आलमनगर में बाढ़ आश्रय स्थल में भी पानी घुस गया जिससे लोगों को नए जगह पर जाना पड़ा है।