तुर्किये में दो घंटे भी नहीं चली रूस-यूक्रेन की वार्ता, बेनतीजा रही शांति के लिए हुई मीटिंग; कहां फंसी बात?
Russia Ukraine War यह वार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव की वजह से संभव हो सकी है। तुर्किए के न्यूज चैनलों पर इस चर्चा का खासा महत्व दिया गया है। रूस का कहना है कि वह कूटनीतिक तरीकों से युद्ध को समाप्त करना चाहता है और युद्ध विराम पर चर्चा करने के लिए तैयार है। लेकिन इस बीच रूस ने कई चिंताओं की ओर भी इशारा किया है।

रॉयटर्स, इस्तांबुल। रूस और यूक्रेन के बीच तीन बरस से ज्यादा वक्त से चल रहे जंग के बीच रूसी और यूक्रेनी वार्ताकारों ने शुक्रवार को इस्तांबुल में पहली बार आमने-सामने शांति वार्ता की।
यह वार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव की वजह से संभव हो सकी है। तुर्किए के न्यूज चैनलों पर इस चर्चा का खासा महत्व दिया गया है। बैठक की शुरुआत में तुर्किए के विदेश मंत्री हकान फिदान भाषण दे रहे थे।
क्या जंग खत्म हो जाएगी?
सीजफायर को लेकर उम्मीदें पहले से ही कम थीं लेकिन गुरुवार को बची खुची उम्मीद की किरण भी अस्त होती दिखी, ये तब हुआ जब ट्रम्प ने कहा कि उनके और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बैठक के बिना कोई प्रगति नहीं होगी। मध्य पूर्व का दौरा खत्म कर अमेरिका वापस लौट रहे राष्ट्रपति ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि वह "जैसे ही हम इसकी व्यवस्था कर लेंगे" रूसी नेता से मुलाकात करेंगे।
फौरन सीजफायर की मांग कर रहा यूक्रेन
इधर, यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख ने अपने देश की प्राथमिकताओं को बताते हुए कहा कि शांति तभी मुमकिन है जब रूस 30 दिन के युद्ध विराम, अगवा किए गए यूक्रेनी बच्चों की वापसी और सभी युद्धबंदियों की अदला-बदली पर राजी हों।
रूस का कहना है कि वह कूटनीतिक तरीकों से युद्ध को समाप्त करना चाहता है और युद्ध विराम पर चर्चा करने के लिए तैयार है। लेकिन उसने कई सवाल और चिंताएं उठाई हैं, जिसमें कहा गया है कि यूक्रेन इस विराम का इस्तेमाल अपनी सेनाओं को आराम देने, अतिरिक्त सैनिकों को जुटाने और अधिक पश्चिमी हथियार हासिल करने के लिए कर सकता है।
पुतिन पर लग रहे ये आरोप
यूक्रेन और उसके सहयोगी देश रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर टालमटोल का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि वह शांति को लेकर गंभीर नहीं हैं। दरअसल ने ही पुतिन ने ही तुर्किए में सीधी बातचीत का प्रस्ताव रखा था, लेकिन उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की की चुनौती को ठुकरा दिया और उनसे व्यक्तिगत रूप से तुर्किए में मिलने की बात कही। इसके बजाय, उन्होंने मध्यम स्तर के अधिकारियों की एक टीम भेजी और यूक्रेन ने भी इसी स्तर के वार्ताकारों को नामित करके जवाब दिया।
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