इस्लामाबाद, ANI: पाकिस्तान इस समय एक साथ कई चुनौतियों से लड़ रहा है। पाकिस्तान में भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है और दूसरे देशों से मदद मांग रहा है। इन सबके साथ ही पाकिस्तान में कानून और व्यवस्था की स्थिति काफी नाजुक हो गई है। पाकिस्तान में आए दिन सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं होती रहती है। एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले कुछ वर्षों में 4000 से अधिक शिया मुस्लिमों की हत्या हुई है। पाकिस्तान में सुन्नी समूह द्वारा शियाओं, अहमदियों और गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को धमकाया जा रहा है और सुन्नी समूह को सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व का समर्थन प्राप्त है।

पाकिस्तान में सांप्रदायिक हिंसा में वृद्धि

कनाडा स्थित एक थिंक टैंक IFFRAS ने कहा कि इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप (ICG) ने 5 सितंबर को प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में बताया है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक मंदी के कारण सांप्रदायिक हिंसा तेज हो सकती है। ICG ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि सांप्रदायिक आतंकवाद अब सुन्नी इस्लामवादी समूहों की सीमा में चलता है, जिसमें ज्यादातर उदार बरेलवी उप-पंथ के अनुयायी शामिल हैं। माना जाता है कि पाकिस्तान की आबादी में इसका बहुत छोटा हिस्सा है।

सांप्रदायिक हिंसा में 4,847 शियाओं की हत्या

बता दें कि 2020 में प्रसिद्ध रक्षा विश्लेषक आयशा सिद्दीका ने कराची, सिंध और पंजाब के अन्य शहरी केंद्रों में सुन्नियों और शियाओं के बीच सांप्रदायिक तनाव के बारे में लिखा। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में कथित तौर पर 2010 और 2018 के बीच सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में करीब 4,847 शियाओं की हत्या हुई है। इससे अलग, पाकिस्तान में आई विनाशकारी बाढ़ ने इस्लामाबाद को काफी हद तक क्षति पहुंचाया है। बाढ़ से पाकिस्तान में करीब एक तिहाई हिस्सा पानी में डूब गया।

पाकिस्तान में शिया मुसलमान कमजोर

इस साल सितंबर से पहले प्रकाशित हुई ICG रिपोर्ट ने कहा था कि ये नए समूह विभिन्न तरीकों से इस काम को कर रहे हैं, जिससे अंतर जातीय हिंसा की घटनाएं बढ़ी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अल्पसंख्यक समुदाय खास कर शिया काफी कमजोर हो चुका है।

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Edited By: Devshanker Chovdhary

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