चाय-चीनी की लत कैसे कर रही है PAK अर्थव्यवस्था को खोखला? पढ़ें क्या है ट्रिपल क्राइसिस
Pakistan Economic Crisis: पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, चाय, चीनी और घी का अत्यधिक सेवन और आयात पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था ...और पढ़ें

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की कड़वी हकीकत। फोटो - जेएनएन
स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रोजमर्रा की जिंदगी में चाय, चीनी और घी का सेवन बेहद आम बात है। लेकिन, क्या आप सोच सकते हैं कि इनकी वजह से किसी देश की अर्थव्यवस्था गर्त में जा रही है। हम बात कर रहे हैं पाकिस्तान की, जो हर दिन अरबों की चीनी और तेल आयात कर रहा है।
पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन में 1 जनवरी 2026 को प्रकाशित हुए एक लेख में इसका खुलासा किया गया है। यह लेख क्लाइमेट चेंज एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट एक्सपर्ट अली तौकीर शेख का है, जिन्होंने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं।
अरबों डॉलर का आयात कर रहा है पाकिस्तान
अली तौकीन शेख के अनुसार, "इस साल मैंने खुद से एक वादा किया है कि मैं चाय, चीनी और घी का सेवन बंद कर दूंगा। यह फैसला सिर्फ मैंने अपनी सेहत के लिहाज से नहीं लिया है। यह आदतें दबे पांव पाकिस्तान को कंगाल कर रही हैं। पाकिस्तान के लोग हर दिन मीठी दूध वाली चाय, मिठाइयां और घी में डूबे पराठें खाते हैं, जिसके लिए हर दिन 4 अरब डॉलर का तेल और 60 करोड़ डॉलर की चायपत्ती का आयात करने के साथ-साथ चीनी पर भारी सब्सिडी देनी पड़ती है।"

पाकिस्तान में डायबिटीज के सबसे ज्यादा मरीज
अली तौकीर शेख का कहना है कि इससे पाकिस्तान में डायबिटीज के आंकड़ों में 31.4 प्रतिशत का इजाफा देखने को मिला है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। जो कभी गर्मजोशी और मेहमाननवाज़ी का प्रतीक हुआ करती थी, वह अब एक राष्ट्रीय कमजोरी का कारण बन गई है। अब समय आ गया है कि हम सच्चाई का सामना करें और इस समस्या का समाधान ढूंढे।
आंकड़े साझा करते तौकीन शेख ने बताया, पाकिस्तानी बहुत ज्यादा चाय पीते हैं। हर साल प्रति व्यक्ति 1.5 किलोग्राम चाय की खपत के साथ पाकिस्तान दुनिया में छठे स्थान पर हैं - जो भारत की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है।
- पाकिस्तान के ज्यादातर घर में रोज 4-5 कप चाय पी जाती है, जिसमें भरपूर चीनी और दूध होता है।
- जूस, सोडा, कन्फेक्शनरी और बेकरी उत्पादों में भी भारी मात्रा में चीनी का इस्तेमाल होता है।
- हम प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 25 किलोग्राम से अधिक चीनी का सेवन करते हैं, जिसमें से ज्यादातर हिस्सा चाय और मिठाई में इस्तेमाल होता है।
शिक्षा-स्वास्थ्य के बजट से 9 गुना अधिक का आयात
डॉन के इस लेख के अनुसार, पाकिस्तान ने 2024 में 4 अरब डॉलर का खाद्य तेल आयात किया था, जिसमें सैचुरेटेड तेल 3 अरब डॉलर का था। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरी रकम 1,100 अरब रुपये से अधिक है, जो पाकिस्तान के शिक्षा और स्वास्थ्य के बजट का नौ गुना और पीआईए के निजीकरण से प्राप्त राशि का 100 गुना अधिक है।
पिछले 5 सालों में पाकिस्तान में चाय और खाद्य तेलों के आयात में 40% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। अगर पाकिस्तान की जनसंख्या इसी तरह बढ़ती रही, तो ये आंकड़े 2030 तक 7 अरब डॉलर तक पहुंच सकते हैं।
-1767435405784.jpg)
गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं लोग
डॉन के इस लेख में अली तौकीर कहते हैं कि घी में मौजूद ट्रांस फैट खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं, जिससे दिल की बीमारी समेत मौत का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज के मामले में पाकिस्तान पहले स्थान पर है और 30 प्रतिशत व्यस्क हाई ब्लड प्रेशर का शिकार हो चुके हैं।
पाकिस्तानियों की चाय में चीनी की मात्रा अक्सर 60 ग्राम से अधिक होती है। यही वजह है कि हर तीन वयस्कों में एक डायबिटीज की चपेट में आ गए हैं। इन बीमारियों के इलाज के लिए लोग दवाओं और अस्पतालों में भारी पैसा खर्च करते हैं, जिससे जीडीपी पर भी तगड़ा असर पड़ता है।
पाकिस्तान की GDP को भारी नुकसान
इन बीमारियों के कारण पाकिस्तान की जीडीपी को हर साल 2-3 प्रतिशत का नुकसान होता है। चीनी की आपूर्ति के लिए 1.5 मिलियन हेक्टेयर (3.7 मिलियन एकड़) में गन्ने की खेती की जाती है, जिसकी सिंचाई के लिए भारी मात्रा में पानी की जरूरत पड़ती है। इससे सिंधू नदी का जलस्तर प्रभावित होता है। जिस पानी से गेहूं और कपास की खेती होनी चाहिए, उसका इस्तेमाल गन्ना सिचांई के लिए होता है। इससे ताजे पानी की उपलब्धता भी घट रही है।

बाढ़ से बढ़ा भ्रष्टाचार
पाकिस्तान में चीनी, तेल और चाय की बढ़ती मांग के बीच तस्करी और मिलावट भी फल-फूल रही है। इस नेटवर्क की मदद से पाकिस्तान में हर साल 4.6 अरब डॉलर का हेरफेर किया जाता है। 2022 और 2025 की बाढ़ ने छोटे किसानों को तबाह कर दिया, कुछ जिलों में 61% तक फसलें नष्ट हो गईं, वहीं विडंबना यह है कि इस क्षेत्र में निर्यात में तेजी आई और मूल्य में 20% से अधिक की वृद्धि देखने को मिली। बाढ़ के कारण स्थानीय कमी का लाभ उठाकर जमाखोरी और कीमतों में वृद्धि बढ़ने लगी।
कैसे हल होगी समस्या?
अली तौकीर अपने लेख में कहते हैं कि सिंधु घाटी सभ्यता सदियों से गन्ने की खेती और गुड़ उत्पादन करती आ रही थी, लेकिन अब बाजार पर चीनी का वर्चस्व स्थापित हो चुका है। पाकिस्तान का पाक इतिहास ऐसे विकल्प प्रस्तुत करता है, जिन्हें हमारी दादी-नानी सहज रूप से समझती थीं। साथ ही ये रीति-रिवाजों और स्वास्थ्य दोनों को मिश्रण प्रस्तुत करता है।
- हमें 'तले हुए और मीठे' खाद्य पदार्थों के उपभोग की संपूर्ण व्यवस्था को समाप्त करना होगा।
- सबसे पहले ज्यादा चीनी वाली चीजों और ट्रांस फैट का सेवन कम करना होगा।
- लोगों को इसके प्रति जागरूक करने की जरूरत है।
- पानी पर मिलने वाली सब्सिडी और मुफ्त सिंचाई पर लगाम लगानी होगी, जिससे किसान फिर से कपास और दालों की खेती पर जोर देंगे।
- खाली जमीन पर कम पानी और प्रति हेक्टेयर अधिक उपज देने वाली कनोला और सूरजमुखी की खेती करने से आयात पर निर्भरता कम हो सकती है, कार्बन फुटप्रिंट घट सकता है और सूखते जलभंडारों पर दबाव कम हो सकता है।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।