पाक में अहमदी समुदाय के व्यक्ति ने खुद को कहा हाफिज, मिली उम्रकैद की सजा
पाकिस्तान में अहमदी मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव जारी है। मुबारक अहमद सानी को खुद को 'हाफिज' कहने और 'तफसीर-ए-सगीर' वितरित करने पर ईशनिंदा के आरोप में आज ...और पढ़ें

मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव बदस्तूर जारी है। एक पाकिस्तानी अदालत ने अहमदी समुदाय के मुबारक अहमद सानी को ईशनिंदा के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सजा का कारण उन्हें खुद को ''हाफिज'' (कुरान को कंठस्थ करने वाला व्यक्ति) कहना और अहमदी समुदाय द्वारा पूजनीय कुरान के अनुवाद एवं व्याख्या की किताब ''तफसीर-ए-सगीर'' वितरित करना था।
मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है और इसे पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न का एक गंभीर मामला बताया है। ऑनलाइन पत्रिका 'बिटर ¨वटर' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 24 दिसंबर, 2025 को पंजाब प्रांत के लालियान स्थित एक अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने ऐसा फैसला सुनाया जो न्याय का दावा करने वाली किसी भी कानूनी व्यवस्था को शर्मिंदा कर देगा।
अहमदी मुस्लिम मुबारक अहमद सानी को पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। उनका अपराध खुद को 'हाफिज' कहना और अपने समुदाय द्वारा पूजनीय कुरान के अनुवाद एवं व्याख्या की पुस्तक को वितरित करना था। रिपोर्ट में कहा गया, ''अदालत का फैसला श्रद्धा को अपराध घोषित करता है, धर्मपरायणता को दंडित करता है, और एक ऐसे व्यक्ति को सताने के लिए हथियार के रूप में धार्मिक किताबों का इस्तेमाल करता है जिसका एकमात्र अपराध ईमानदारी और भक्ति के साथ अपने धर्म का पालन करना था।
मुबारक अहमद सानी ने खुद को एक मुस्लिम के रूप में प्रस्तुत किया जो पाकिस्तानी कानूनी व्यवस्था के तहत एक अपराध है क्योंकि पाकिस्तान में अहमदियों को कानूनी रूप से गैर-मुस्लिम घोषित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अदालत का फैसला ''कानूनी तर्क और धार्मिक विनम्रता'' दोनों का उल्लंघन करता है।
अदालत ने अपने फैसले के लिए पाकिस्तान के ईशनिंदा कानून के उस प्रविधान का हवाला दिया जो कुरान को जलाने, फाड़ने या किसी अन्य तरीके से अपवित्र करने वालों को आजीवन कारावास की सजा देता है। 'हालांकि, सानी ने इनमें से कुछ भी नहीं किया। उन्होंने तो इसका प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने इसका आदर ही किया।'
(न्यूज एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)

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