इस्लामाबाद, एजेंसी। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व क्रिकेटर इमरान खान ने एक बार फिर अमेरिका के खिलाफ आग उगली है। उन्‍होंने कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में अमेरिका पाकिस्तान को 'किराए की बंदूक' की तरह इस्तेमाल कर रहा है और भारत के साथ अमेरिका के संबंध बेहद 'सभ्य संबंधों' की तुलना में उनके देश के साथ बेहद अशोभनीय हैं। अप्रैल में वाशिंगटन पर उन्हें सत्ता से हटाने की साजिश रचने का बार-बार आरोप लगाने के बाद इमरान खान ने अमेरिका के साथ संबंध सुधारने के लिए अपनी तत्परता का संकेत देने के कुछ दिनों बाद उनकी टिप्पणी की।

पाकिस्तान और अमेरिका का बहुत ही अशोभनीय रिश्‍ता

अमेरिकी पब्लिक ब्राडककास्टर पब्लिक ब्राडकास्टिंग सर्विस द्वारा उनके हाल के यू टर्न और उनकी पिछली टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर कि अमेरिका पाकिस्तान को "गुलाम की तरह" मानता है, इमरान खान ने कहा क‍ि मेरा मतलब है क‍ि यह सिर्फ एक तथ्य है कि पाकिस्तान- अमेरिका के संबंध असंतुलित हो गए हैं। उन्होंने कहा क‍ि उदाहरण के लिए दोनों देशों के बीच अमेरिका-भारत की तरह संबंध नहीं है, जिसे मैं एक बहुत ही सभ्य संबंध, एक प्रतिष्ठित संबंध कहता हूं। पाकिस्तान में हम रहे हैं। आतंक पर युद्ध में हम एक किराए की बंदूक की तरह थे। और मुझे लगता है यह एक बहुत ही अशोभनीय रिश्ता है।

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पिछले दिनों अमेरिका से संबंध सुधारने पर दिया था जोर

70 वर्षीय इमरान खान को अप्रैल महीने में अविश्‍वास वोट के जरिये अपदस्थ कर दिया गया था। इमरान खान ने पिछले दिनों फाइनेंशियल टाइम्स के साथ एक इंटरव्‍यू में कहा था कि अगर वह फिर से चुने जाते हैं तो वह अमेरिका के साथ संबंध सुधारना चाहते हैं और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें हटाने के लिए अमेरिका को दोष नहीं देंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या वह मानते हैं कि अमेरिका के साथ उनके अच्छे कामकाजी संबंध हो सकते हैं, इस पर इमरान खान ने कहा क‍ि अमेरिका एक लोकतांत्र‍िक देश है। लोकतंत्र आलोचना को स्वीकार करता है।

लोकतंत्र अन्य लोगों के दृष्टिकोण को स्वीकार करता है। मास्टर गुलाम नहीं की तरह व्‍यवहार करते हैं। अमेरिका के साथ पाकिस्तान के संबंध हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए सिर्फ शासन में बदलाव के कारण यह नहीं होना चाहिए कि मुझे अमेरिका के साथ भविष्य के संबंध नहीं रखने चाहिए। उसने बात में जोड़ा क‍ि और हां, मुझे आलोचना करने का अधिकार है।

इमरान खान ने बार-बार किया दावा, उन्‍हें सत्‍ता से हटाने में अमेरिका की भूमिका

इमरान खान पहले यह दावा करते रहे थे कि उन्‍हें सत्‍ता से हटाने में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और अमेरिका के बीच एक साजिश का नतीजा थी। अमेरिका पाकिस्तान का एक शीर्ष सुरक्षा भागीदार है, जिसने देश को अरबों डालर की सैन्य सहायता दी है। इमरान खान ने बार-बार दावा किया है कि अमेरिकी विदेश विभाग में दक्षिण एशिया से निपटने वाले शीर्ष अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू उनकी सरकार को गिराने के लिए एक 'विदेशी साजिश' में शामिल थे।

पाकिस्तान में लांग मार्च के दौरान इमरान खान को लगी थी गोली

लांग मार्च के दौरान पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के अध्यक्ष इमरान खान को इस महीने की शुरुआत में दाएं पैर में गोली लगी थी, जब दो बंदूकधारियों ने वजीराबाद इलाके में एक कंटेनर ट्रक पर खड़े होकर उन पर और अन्य लोगों पर गोलियों की बौछार कर दी थी। वह पाकि‍स्‍तान में मध्यावधि चुनाव के लिए दबाव बनाने के लिए सरकार के खिलाफ मार्च का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने अपनी हत्या की साजिश रचने के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, आंतरिक मंत्री राणा सनाउल्लाह और मेजर जनरल फैसल नसीर को दोषी ठहराया है।

घायल होने के बाद तेजी से स्‍वस्‍थ हो रहा हूं

उन्होंने कहा क‍ि 'ठीक है, मैं बहुत भाग्यशाली था। मेरे दाहिने पैर में तीन गोलियां लगी थीं और मेरे बाएं पैर में कुछ छर्रे लगे थे। मांस के घाव अच्छी तरह से ठीक हो रहे हैं, लेकिन तीसरी गोली से मेरी हड्डी टूट गई, जिससे मुझे थोड़ी परेशानी हो रही है। मुझे उम्मीद है क‍ि अगले दो- तीन हफ्तों में, मुझे चलना चाहिए। मैं अपने पैरों पर वजन डाल रहा हूं।' अगले साल अगस्त में नेशनल असेंबली के भंग होने के 60 दिनों से कम समय में पाकिस्तान में आम चुनाव होने चाहिए।

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पाकि‍स्‍तान की आर्थिक हालत काफी खराब

सरकार के खिलाफ उनके विरोध मार्च के बारे में पूछे जाने पर और उनकी पार्टी जल्दी चुनाव के लिए दबाव क्यों बना रही है, इस बारे में इमरान खान ने कहा क‍ि हम इस देश में हो रहे अन्याय के बारे में बात करते हैं, जहां ये बदमाशों का गिरोह हम पर थोपा गया है। और दूसरी बात यह है क‍ि अर्थव्यवस्था जमीन पर चली गई है। पाकिस्तान के बाहर और देश के भीतर के वित्तीय बाजारों ने इस सरकार में विश्वास खो दिया है। उन्होंने कहा क‍ि सभी आर्थिक संकेतक नीचे जा रहे हैं। इसलिए यदि वे तुरंत चुनाव नहीं कराते हैं, तो यह मेरी पार्टी को परेशान नहीं करता है, क्योंकि हम हर समय लाभ हासिल कर रहे हैं। लेकिन हमारी चिंता यह है कि वे देश को एक स्थिति में छोड़ देंगे, जहां यह किसी के भी नियंत्रण से बाहर होगा।

पीएम नहीं, सेना तय करती है अमेरिका-पाकिस्तान संबंध

एएनआइ के अनुसार, व्हाइट हाउस की पूर्व अधिकारी लीजा कर्टिस ने कहा है पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सत्ता में वापसी होती है अथवा नहीं, इसका अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों के भविष्य पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। दक्षिण एशियाई राष्ट्र में इस तरह के फैसले सेना प्रमुख लेते हैं, प्रधानमंत्री नहीं। डान की रिपोर्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन में व्हाइट हाउस में दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों की प्रभारी रहीं कर्टिस ने यह टिप्पणी सोमवार शाम एक सेमिनार में की।

Edited By: Arun kumar Singh

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