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    भारत के एक्शन से खौफ में पाकिस्तान, कश्मीर को लेकर चीन के सामने रोया दुखड़ा

    Updated: Tue, 06 Jan 2026 12:10 AM (IST)

    चीन और पाकिस्तान के बीच सातवीं रणनीतिक वार्ता में कश्मीर, दक्षिण एशिया और अफगानिस्तान पर चर्चा हुई। पाकिस्तान ने कश्मीर में 'एकतरफा कार्रवाई' पर चिंता ...और पढ़ें

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    पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार। (फाइल)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बांग्लादेश के साथ त्रिपक्षीय सहयोग और कश्मीर के संदर्भ में चीन और पाकिस्तान के बीच सोमवार को रणनीतिक वार्ता हुई। इसमें दोनों देशों ने दक्षिण एशिया में किसी भी 'एकतरफा कार्रवाई' का विरोध दोहराया।

    आशंकित पाकिस्तानी पक्ष ने चीनी पक्ष के समक्ष वही अपना चिर-परिचित 'कश्मीर में एकतरफा कार्रवाई' का दुखड़ा रोया तथा जम्मू और कश्मीर की स्थिति पर अपने रुख एवं ताजा घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी।

    चीन ने भी एक बार फिर अपना पुराना रुख दोहराया कि जम्मू और कश्मीर ''विवाद इतिहास की देन है, और इसे यूएन चार्टर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों तथा द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार उचित एवं शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जाना चाहिए''।

    सोमवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार के बीच सातवीं रणनीतिक वार्ता के समापन पर एक संयुक्त बयान जारी किया गया। इसमें बीजिंग ने इस्लामाबाद की इस मांग का समर्थन किया कि अफगानिस्तान को आतंकी संगठनों को खत्म करना चाहिए। हालांकि, काबुल अपने देश में आतंकी संगठनों की मौजूदगी से इनकार करता रहा है।

    बयान में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद बने चीन-बांग्लादेश-पाकिस्तान त्रिपक्षीय सहयोग तंत्र का इस्तेमाल करके ''नए परिणाम देने'' के लिए ''तैयारी'' की बात भी कही गई।

    इसमें कहा गया, ''दोनों पक्षों ने यूएन चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नियंत्रित करने वाले बुनियादी नियमों पर आधारित दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय व्यवस्था के महत्व पर जोर दिया। साथ ही, किसी भी एकतरफा कार्रवाई का विरोध दोहराया और दक्षिण एशिया में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के महत्व और बातचीत से सभी लंबित विवादों को सुलझाने की जरूरत की पुष्टि की।''

    बयान में कहा गया है, ''दोनों पक्षों ने समानता और परस्पर लाभ के सिद्धांत के तहत सीमा पार जल संसाधनों पर सहयोग करने की इच्छा जताई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनी जिम्मेदारियों को पूरा करने की जरूरत पर जोर दिया'', लेकिन इसमें भारत द्वारा सिंधु जल संधि स्थगित किए जाने के फैसले का कोई उल्लेख नहीं था। इसमें अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा एवं स्थिरता बनाए रखने के महत्व को दोहराया गया।

    दोनों पक्षों ने नए परिणाम हासिल करने के लिए चीन-अफगानिस्तान-पाकिस्तान त्रिपक्षीय विदेश मंत्रियों की वार्ता और चीन-बांग्लादेश-पाकिस्तान सहयोग तंत्र का इस्तेमाल जारी रखने की इच्छा जताई।

    (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)