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    2022 Booker Prize: श्रीलंकाई लेखक शेहान करुणातिलका के उपन्यास को मिला 2022 का बुकर पुरस्कार

    By AgencyEdited By: Dhyanendra Singh Chauhan
    Updated: Tue, 18 Oct 2022 08:15 AM (IST)

    2022 Booker Prize बुकर प्राइज ने ट्वीट किया कि हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि Booker Prize 2022 के विजेता शेहान करुणातिलका हैं। शेहान करुणातिलका का यह दूसरा उपन्यास हैं। इसका नाम द सेवन मून्स ऑफ माली अल्मेडा है। (फाइल फोटो)

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    शेहान करुणातिलका का यह दूसरा उपन्यास ।

    लंदन, एएनआइ। श्रीलंकाई लेखक शेहान करुणातिलका (Shehan Karunatilaka) ने सोमवार को उपन्यास के लिए 2022 का बुकर पुरस्कार जीता है। करुणातिलका को यह पुरस्कार 'द सेवन मून्स ऑफ माली अल्मेडा' किताब के लिए दिया गया है।

    बुकर प्राइज ने ट्वीट किया कि हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि Booker Prize 2022 के विजेता शेहान करुणातिलका हैं। 'द सेवन मून्स ऑफ माली अल्मेडा' शेहान करुणातिलका का यह दूसरा उपन्यास हैं। यह उपन्यास गृहयुद्ध से घिरे श्रीलंका की जानलेवा तबाही के बीच एक कर्कश, मार्मिक रूप से मजेदार व्यंग्य है।

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    शेहान करुणातिलका को श्रीलंका के अग्रणी लेखकों में से एक माना जाता है। अपने उपन्यासों के अलावा उन्होंने रॉक सॉन्ग्स, पटकथा और यात्रा कहानियां भी लिखी हैं।

    2009 में गृहयुद्ध की समाप्ति के बाद सोचना शुरू किया

    श्रीलंकाई लेखक ने अपने किताब के बारे में कहा कि उन्होंने इसके बारे में 2009 में गृहयुद्ध की समाप्ति के बाद सोचना शुरू किया था। तब इस बात पर तीखी बहस हुई कि कितने नागरिक मारे गए और यह किसकी गलती थी।

     यह था एक विचित्र विचार

    करुणातिलका ने कहा कि एक भूत की कहानी जहां मृतक अपने दृष्टिकोण की पेशकश कर सकते थे। यह एक विचित्र विचार था, लेकिन मैं वर्तमान के बारे में लिखने के लिए पर्याप्त बहादुर नहीं था। इसलिए मैं 1989 के अंधेरे दिनों में 20 साल पीछे चला गया।

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    गृहयुद्ध को खत्म करने में लग गए लगभग 26 साल

    श्रीलंका में अलगाववादी तमिल सेनाओं और सरकार के बीच भारी युद्ध था। इसमें नागरिकों सहित दोनों पक्षों की ओर से डेढ़ लाख (150000) से अधिक लोगों की मौत हुई थी। 1983 में एक छोटे से विद्रोह के रूप में शुरू होकर सरकार को अंततः खूनी गृहयुद्ध को खत्म करने में लगभग 26 साल लग गए।

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    इस बीच, 22 मिलियन लोगों का देश श्रीलंका एक अभूतपूर्व आर्थिक उथल-पुथल की चपेट में है। यह सात दशकों में सबसे खराब स्थिति है। श्रीलंका में लाखों लोग भोजन, दवा, ईंधन और अन्य आवश्यक चीजें खरीदने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।