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    इस समुदाय की मदद के लिए आगे आए मस्क, तोहफे में दी इंटरनेट सेवा; अब लोग कर रहे ये गंदे काम

    By Agency Edited By: Babli Kumari
    Updated: Thu, 06 Jun 2024 05:25 PM (IST)

    ब्राजील की मारुबो जनजाति के नाम से जाने जाने वाले सुदूर वर्षावन समुदाय (Remote Rainforest Community) को नौ महीने पहले मस्क की स्टारलिंक सेवा मिली थी लेकिन अब तक इस सुविधा ने समुदाय को इसके विभिन्न प्रतिकूल प्रभावों के कारण कटु रूप से विभाजित कर दिया है। इंटरनेट सुविधा के बाद समुदाय के वरिष्ठों का मानना है कि जनजाति के कुछ युवा सदस्य समूह चैट अश्लील वीडियो देख रहे हैं।

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    एलन मस्क ने की ब्राजील के समुदाय की मदद (फाइल फोटो)

    डिजिटल डेस्क, ब्रासीलिया। ब्राजील के सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले 2,000 सदस्यों वाले एक जनजाति को आखिरकार काफी संघर्षों के बाद इंटरनेट की सुविधा मिली। इन जनजाति समूह को कुछ महीने पहले ही स्टारलिंक की सेवा दी गई थी। 'न्यू यॉर्क पोस्ट' के अनुसार, मारुबो जनजाति के नाम से जाने जाने वाले सुदूर वर्षावन समुदाय (Remote Rainforest Community) को नौ महीने पहले मस्क की स्टारलिंक सेवा मिली थी, लेकिन अब तक इस सुविधा ने समुदाय को इसके विभिन्न प्रतिकूल प्रभावों के कारण कटु रूप से विभाजित कर दिया है।

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    इंटरनेट सुविधा मिलने के बाद समुदाय के वरिष्ठों का मानना है कि जनजाति के कुछ युवा सदस्य समूह चैट में अश्लील वीडियो देख रहे हैं साथ ही एक दूसरे को ऐसे वीडियो साझा कर रहे हैं और उनके बीच काफी आक्रामक 'यौन व्यवहार' देखा गया है।

    समुदाय के वृद्ध पुरुष हैं नाखुश

    रिपोर्टों के अनुसार, जब इंटरनेट सुविधा शुरू में आई, तो समुदाय केवल इसलिए खुश था क्योंकि उन्हें बहुत लंबे समय तक वेब से दूर रखा गया था। हालांकि, समुदाय के वृद्ध पुरुषों के अनुसार, इंटरनेट सुविधा की वजह से जनजाति आलसी हो गई है और इसके लोगों में 'गोरे लोगों' जैसी आदतें विकसित हो रही हैं।

    युवा जनजाति के सदस्य अश्लील वीडियो देखने में मशगूल

    समुदाय के वरिष्ठों ने यह भी बताया कि जनजाति के युवाओं का परिवारों के बीच संचार भी कम हो गया है, जो मारुबो समुदाय का एक सामान्य दैनिक हिस्सा माना जाता था। जनजाति के सदस्य अब अपने आस-पास के लोगों से बात किए बिना घंटों सोशल मीडिया से जुड़े रहते हैं। जनजातीय क्षेत्र में इंटरनेट सुविधा इस उम्मीद के साथ दी गई थी कि क्षेत्र के लोग आपात स्थिति में जल्दी से मदद मांग सकेंगे, लेकिन सेवा के आने से आदिवासियों के बीच इसका उल्टा असर देखने को मिला है।

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