सुधारवादियों पर कसी नकेल, विरोध करने वालों का किया दमन... इस तरह ईरान के सुप्रीम लीडर बने खामेनेई
खामेनेई के लिए पहला बड़ा खतरा सुधार आंदोलन था। आंदोलन ने निर्वाचित अधिकारियों को अधिक शक्ति देने की वकालत की। खामेनेई के कट्टरपंथी समर्थकों को डर था कि इससे इस्लामी गणतंत्र प्रणाली खत्म हो जाएगी। खामेनेई ने मौलवियों को एकजुट करके सुधारवादियों पर नकेल कसा। 2009 में मतदान में धांधली के आरोपों को लेकर देश भर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।

एपी, काहिरा। ईरान-इजरायल के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से जिस शख्स की सर्वाधिक चर्चा हो रही है वह अयातुल्लाह अली खामेनेई हैं। खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता हैं तो चर्चा लाजिमी भी है। तीन दशकों से भी अधिक समय से खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता हैं। इस दौरान कई बार आंतरिक बगावत की कोशिशें हुई, लेकिन उन्होंने सरकार विरोधी आवाज को कुचल दिया।
अब खामेनेई अपने जीवन की सबसे कठिन परीक्षा का सामना कर रहे हैं। ईरान का कट्टर दुश्मन, इजरायल हवाई हमलों से देश के सैन्य नेतृत्व को खत्म कर चुका है और परमाणु कार्यक्रम को नष्ट कर रहा है। खामेनेई की जिंदगी भी खतरों में है, लेकिन 86 वर्षीय सर्वोच्च नेता ने बुधवार को वीडियो संबोधन में अमेरिका को चेताते हुए कहा था, ईरान आत्मसमर्पण करने वाला नहीं। यदि अमेरिका हस्तक्षेप करता है, तो उसे अपूरणीय क्षति होगी।
आइए जानने का प्रयास करते हैं कि कौन हैं खामेनेई, जिन्होंने इस्लामी क्रांति के बाद ईरान को इस्लामी गणराज्य को बदल दिया। एक सामान्य मौलवी रहे खामेनेई किस तरह ईरान के सर्वोच्च नेता बने।
1989 में ईरान के सर्वोच्च नेता बने खामेनेई
- अयातुल्ला रूहोल्लाह खोमेनी के उत्तराधिकारी अयातुल्लाह खामेनेई 1989 में ईरान के सर्वोच्च नेता बने
- खामेनेई ने साधारण मौलवी ने सर्वोच्च नेता के पद तक का सफर तय किया। उन्होंने खोमैनी की तुलना में तीन गुना अधिक समय से शासन कर रहे हैं।
- उन्होंने शिया मुस्लिम मौलवियों द्वारा शासन की प्रणाली को मजबूत किया। वह अल्लाह के बाद ईरान में निर्विवाद रूप से सबसे शक्तिशाली शख्स हैं।
रिवोल्युशनरी गार्ड को ईरान की प्रमुख शक्ति बनाया
खामेनेई ने अर्धसैनिक रिवोल्युशनरी गार्ड को ईरान की सैन्य और आंतरिक राजनीति में प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित किया। यह ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम की देखरेख करता है।
रिवोल्युशनरी गार्ड की अंतरराष्ट्रीय शाखा, कुद्स फोर्स ने यमन से लेकर लेबनान तक फैले ईरान समर्थक प्राक्सी के समूह 'प्रतिरोध की धुरी' को एक साथ जोड़ा, जिसने वर्षों तक ईरान को पूरे क्षेत्र में शक्तिशाली बनाया।
कई घरेलू चुनौतियों से निपटने में सफल रहे खामेनेई
खामेनेई के लिए पहला बड़ा खतरा सुधार आंदोलन था। आंदोलन ने निर्वाचित अधिकारियों को अधिक शक्ति देने की वकालत की। खामेनेई के कट्टरपंथी समर्थकों को डर था कि इससे इस्लामी गणतंत्र प्रणाली खत्म हो जाएगी।
खामेनेई ने मौलवियों को एकजुट करके सुधारवादियों पर नकेल कसा। मौलवियों द्वारा संचालित अनिर्वाचित निकाय प्रमुख सुधारों या रिफॉर्म को रोकने में सफल रहे और सुधार की मांग करने वाले उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोक दिया।
दमनात्मक कार्रवाई में सैकड़ों लोग मारे गए
- 2009 में मतदान में धांधली के आरोपों को लेकर देश भर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। 2017 और 2019 में आर्थिक विरोध प्रदर्शन हुए। विरोध प्रदर्शनों ने ईरान में मौलवियों के शासन, भ्रष्टाचार और आर्थिक परेशानियों के प्रति आक्रोश उजागर किया।
- 2022 में महसा अमिनी की मौत पर और अधिक देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुए, जब पुलिस ने उन्हें हिजाब ठीक से न पहनने के कारण हिरासत में ले लिया और हिरासत में अमीनी की मौत हो गई। दमनात्मक कार्रवाई में सैकड़ों लोग मारे गए, तथा सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया, तथा ऐसी खबरें आईं कि बंदियों को जेल में यातना देकर मार दिया गया या उनके साथ दुष्कर्म किया गया।
सद्दाम हुसैन को सत्ता से बाहर किया
खामेनेई ने ईरान को क्षेत्रीय शक्ति के रूप में किया स्थापित जब खामेनेई ने सत्ता संभाली, ईरान इराक के साथ अपने लंबे युद्ध से उबर ही रहा था। इस युद्ध ने देश को लगभग अलग-थलग कर दिया था। खामेनेई के तीन दशकों के अधिक के शासनकाल ईरान पूरे पश्चिम एशिया में प्रभाव रखने वाली मुखर शक्ति के तौर पर उभरा। ईरान को एक बड़ी बढ़त अमेरिका द्वारा 2003 में सद्दाम हुसैन को सत्ता से बेदखल करने से मिली।
सद्दाम हुसैन के सत्ता से बेदखल होने के बाद इराक में ईरानी-सहयोगी शिया राजनेताओं और मिलिशिया को सत्ता मिली। इराक ने ईरान के प्रतिरोध की धुरी में अहम भूमिका निभाई, जिसमें बशर असद के सीरिया, लेबनान के हिजबुल्ला, फलस्तीनी आतंकी समूह हमास और यमन में हाउती विद्रोही शामिल थे। 2015 तक, यह गठबंधन सबसे मजबूत था।
पिछले दो वर्षों में हुआ नाटकीय उलटफेर
सात अक्टूबर, 2023 को इजरायल पर हमास के हमले के बाद इजरायल ने गाजा पट्टी पर पलटवार किया। इजरायल ने हमास को लगभग बर्बाद कर दिया है, हालांकि हमास अभी खत्म नहीं हुआ है। सात अक्टूबर के हमले के बाद इजरायल ने ईरान और सहयोगियों को कुचलने का लक्ष्य बना लिया। इजरायल ने हिजबुल्ला को भी काफी कमजोर कर दिया।
इजरायल ने पिछले वर्ष लेबनान में कई सप्ताह तक बमबारी की थी। हिजबुल्ला के लिए इससे भी बड़ा झटका दिसंबर में सीरिया के बशर अल-असद का पतन था, जब सुन्नी विद्रोहियों ने राजधानी पर चढ़ाई कर उन्हें सत्ता से हटा दिया। ईरान की प्रतिरोध धुरी अब तक के सबसे निम्न स्तर पर है।
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