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    2000 KM दूर से इजरायल ने छोड़ी घातक मिसाइल और ईरान का न्यूक्लियर सेंटर तबाह, सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा भयावह मंजर

    Updated: Fri, 20 Jun 2025 09:00 AM (IST)

    इजरायल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमला किया जिससे पश्चिमी एशिया में तनाव बढ़ गया है। नातांज जहा 50000 से ज़्यादा सेंट्रिफ्यूज हैं और इसफहान का परमाणु रिसर्च सेंटर भी हमले का निशाना बने। तेहरान के पास फोर्डो जो ईरान का सबसे सुरक्षित परमाणु ठिकाना माना जाता है और तबरीज मिसाइल सेंटर पर भी हमले हुए।

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    परमाणु साइट पर हमलों की सटीकता और निशानों की वजह से दुनिया की निगाहें ईरान की तरफ हैं।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इजरायल ने ईरान के अहम परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। सैटेलाइट तस्वीरों से इन हमलों की तबाही का अंदाजा हो रहा है। यह कार्रवाई पश्चिमी एशिया के बदलते सियासी मंजर को और उलझा सकती है।

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    परमाणु साइट पर हमलों की सटीकता और निशानों की वजह से दुनिया की निगाहें ईरान की तरफ हैं। इजरायल का हर हमला ईरान की परमाणु ताकत, मिसाइल बनाने की क्षमता को कम करना है। आइए, उन अहम ठिकानों पर नजर डालें, जिन्हें निशाना बनाया गया और ईरान न्यूक्लियर मंसूबों के लिए ये कितने अहम हैं, समझते हैं।

    नातांज में 50 हजार सेंट्रिफ्यूज

    नातांज को ईरान का "परमाणु रत्न" कहा जाता है, जहां 50,000 से ज़्यादा सेंट्रिफ्यूज यूरेनियम को मजबूत करने का काम करते हैं। इसे आधिकारिक तौर पर शहीद अहमदी रोशन परमाणु केंद्र कहा जाता है। यहां ज़्यादातर मशीनें ज़मीन के नीचे बनी हैं। सैटेलाइट तस्वीरों में हमले से पहले और बाद की हालत साफ दिख रही है।

    वहीं इसफहान में 1984 से चीनी मदद से बना परमाणु रिसर्च सेंटर है, जो ईरान का सबसे बड़ा रिसर्च ठिकाना है। इसफहान यूनिवर्सिटी में करीब 3,000 साइंटिस्ट काम करते हैं। खबरों के मुताबिक, चार अहम रिसर्च इमारतों को हाल के हमले में नुकसान पहुंचा है।

    पहाड़ों में छिपा ईरान का न्यूक्लियर किला, जिसे इजरायल भेद दिया

    तेहरान से सिर्फ 160 किलोमीटर दूर, पहाड़ों में बने फ़ोर्डो को ईरान का सबसे मजबूत परमाणु ठिकाना माना जाता है। यहां 1,000 से ज़्यादा तेज सेंट्रिफ्यूज हैं, जो यूरेनियम को 60% तक मज़बूत कर सकते हैं। इसे हवाई हमलों से बचाने के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है।

    तबरीज मिसाइल सेंटर

    उत्तर-पश्चिमी ईरान में, तबरीज साइट शाहब-1, 2 और 3 सहित लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों के विकास और तैनाती का समर्थन करती है। विश्लेषकों का सुझाव है कि यह सुविधा पूर्वी और मध्य यूरोप के कुछ हिस्सों को सैद्धांतिक सीमा के भीतर रखती है। यहां भी इजरायली बमबारी के सबूत दिखते हैं।

    मशहद एयरफील्ड

    ईरान के दूसरे सबसे व्यस्त हवाई अड्डे और एक प्रमुख सैन्य केंद्र के रूप में मशहद लंबी दूरी के वायु सेना मिशनों को करने में सक्षम है। इजरायल से 2,300 किमी दूर स्थित यहां पर हमला ट्यूनिस में पीएलओ पर 1985 की ऐतिहासिक इजरायली बमबारी की याद दिलाता है। यह इजरायल का अब तक का सबसे दूरगामी सैन्य अभियान था।

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