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    भारत और सऊदी अरब में हाई लेवल मीटिंग, रिफाइनिंग में निवेश सहित कई मुद्दों पर डील पक्की

    Updated: Mon, 29 Jul 2024 10:20 AM (IST)

    भारत और सऊदी अरब ने निवेश के विभिन्न अवसरों पर उच्च स्तरीय टास्क फोर्स की पहली बैठक की। निवेश पर टास्क फोर्स की पहली बैठक में पारस्परिक रूप से लाभकारी तरीके से दोतरफा निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उपायों की समीक्षा की गई। बैठक की सह-अध्यक्षता प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी के मिश्रा और सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान बिन अब्दुल अजीज अल सऊद ने की।

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    भारत ने की सऊदी अरब के साथ इन्वेस्टमेंट पर टास्क फोर्स की पहली मीटिंग (फाइल फोटो)

    एएनआई, नई दिल्ली। भारत और सऊदी अरब ने पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर में निवेश को लेकर हाई लेवल टास्क फोर्स' की पहली बैठक वर्चुअली आयोजित की। प्रधानमंत्री कार्यालय के एक बयान के अनुसार, रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल संयंत्र, नई और नवीकरणीय ऊर्जा, बिजली, दूरसंचार, नवाचार सहित सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय निवेश के विभिन्न अवसरों पर रविवार को रचनात्मक चर्चा हुई।

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    बयान के अनुसार बैठक की सह-अध्यक्षता प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी के मिश्रा और सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद ने की। दोनों पक्षों ने टास्क फोर्स की तकनीकी टीमों के बीच हुई चर्चाओं की समीक्षा की और पारस्परिक रूप से लाभप्रद तरीके से दो-तरफा निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उपायों की विस्तृत समीक्षा की।

    अमेरिकी डॉलर के सऊदी निवेश पर भी हुई चर्चा

    बैठक के दौरान, प्रधान मंत्री के प्रधान सचिव ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधान मंत्री की यात्रा के दौरान किए गए 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के सऊदी निवेश को सक्रिय समर्थन प्रदान करने के भारत सरकार के दृढ़ इरादे को दोहराया। दोनों पक्ष चर्चाओं को आगे बढ़ाने और विशिष्ट निवेशों पर एक समझौते पर पहुंचने के लिए दोनों पक्षों की तकनीकी टीमों के बीच नियमित परामर्श पर सहमत हुए।

     सऊदी के निवेश के लिए फिर दिया समर्थन

    पेट्रोलियम सचिव के नेतृत्व में एक सशक्त प्रतिनिधिमंडल तेल और गैस क्षेत्र में पारस्परिक रूप से लाभप्रद निवेश पर चर्चा के लिए सऊदी अरब का दौरा करेगा। बयान में कहा गया है कि सऊदी पक्ष को भारत में सॉवरेन वेल्थ फंड पीआईएफ का एक कार्यालय स्थापित करने के लिए भी आमंत्रित किया गया था। इसमें दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जिनमें नीति आयोग के सीईओ, आर्थिक मामलों के सचिव, वाणिज्य, विदेश मंत्रालय, डीपीआईआईटी, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस और भारत के बिजली सचिव शामिल हैं।

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