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    शिगेरु इशिबा के बाद चिनफिंग और पुतिन से मुलाकात, आखिर क्यों अहम है पीएम मोदी का चीन दौरा?

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 10:12 PM (IST)

    शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के लिए चीन तैयार है। प्रधानमंत्री मोदी एससीओ सम्मेलन में भाग लेने के लिए तियानजिन पहुंचे जहां उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से बात की और भारत ने यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के प्रयासों का समर्थन किया। मोदी की चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता होने की भी संभावना है।

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    चीन में क्या-क्या करेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए चीन में मंच सज चुका है। भारत पर लगाए गए भारी-भरकम अमेरिकी टैरिफ के बीच एससीओ मंच पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक साथ होंगे। सम्मेलन पर दुनियाभर की नजरें टिकी हैं।

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    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस सम्मेलन में शिरकत करने के लिए शनिवार को तियानजिन पहुंच गए। मोदी सात साल बाद चीन की धरती पर पहुंचे हैं। चीन पहुंचने के बाद शिखर सम्मेलन से पहले शनिवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने मोदी से फोन पर बातचीत की। इस दौरान पीएम ने जेलेंस्की को आश्वस्त किया कि भारत यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने के सभी प्रयासों का समर्थन करता है।

    चीन से संबंध सुधारने की कोशिश

    मोदी की चीन यात्रा ऐसे समय हो रही है जब हाल ही में चीनी विदेश मंत्री वांग ई ने भारत का दौरा किया था। विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के साथ वांग की व्यापक वार्ता के बाद भारत और चीन ने दोनों पक्षों के बीच स्थिर, सहयोगात्मक और दूरदर्शी संबंधों के लिए कई उपायों की घोषणा की है।

    इन उपायों में विवादित सीमा पर संयुक्त रूप से शांति बनाए रखना, सीमाओं को व्यापार के लिए फिर से खोलना और जल्द से जल्द सीधी उड़ान सेवाएं बहाल करना आदि शामिल हैं। जून 2020 में गलवन घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई घातक झड़पों के बाद दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव आ गया था।

    चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे पीएम मोदी

    रविवार को मोदी की चीनी राष्ट्रपति चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक होनी है। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और चीन दोनों ही ट्रंप की टैरिफ नीति के कारण वैश्विक व्यापार में उत्पन्न तनाव के बीच अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर विचार कर रहे हैं।

    किन मुद्दों पर हो सकती है बातचीत?

    इस बैठक में मोदी और चिनफिंग के बीच भारत-चीन आर्थिक संबंधों का जायजा लेने और पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद के बाद रिश्तों में आई तल्खी को दूर करने के उपायों पर चर्चा होने की संभावना है। रविवार और सोमवार को होने वाले इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के दौरान, मोदी के रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने की भी संभावना है।

    पीएम मोदी की जेलेंस्की से हुई बात 

    यहां बता दें कि भारत और चीन पर ट्रंप ने टैरिफ थोपा है तो उधर रूस पर भी कई प्रतिबंध लगा रखे हैं। उधर, तियानजिन पहुंचने के कुछ समय बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की का मोदी को फोन आया। इस दौरान मोदी ने जेलेंस्की से कहा कि भारत यूक्रेन में जंग समाप्त करने के सभी प्रयासों का समर्थन करता है।

    बाद में मोदी ने एक्स पर लिखा- '' राष्ट्रपति जेलेंस्की को उनके फोन काल के लिए धन्यवाद। हमने चल रहे संघर्ष, इसके मानवतावादी पहलू और शांति एवं स्थिरता बहाल करने के प्रयासों पर विचार-विमर्श किया। भारत इस दिशा में सभी प्रयासों का पूर्ण समर्थन करता है।''

    विदेश मंत्रालय ने ब्रीफिंग में यह भी कहा के दोनों नेताओं ने भारत-यूक्रेन द्विपक्षीय साझेदारी में प्रगति की समीक्षा की और आपसी हित के सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।

    पीएम बोले- भारत और चीन का मिलकर काम करना जरूरी

    जापान से तियानजिन पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री ने इंटरनेट मीडिया पर एक पोस्ट में कहा- ''तियानजिन, चीन में उतरा। एससीओ शिखर सम्मेलन में विचार-विमर्श और विश्व के विभिन्न नेताओं से मिलने की प्रतीक्षा कर रहा हूं।''

    इस दौरान मोदी का होटल पहुंचने पर भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया गया। तियानजिन पहुंचने से पहले मोदी ने कहा था कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में स्थिरता लाने के लिए भारत और चीन का मिलकर काम करना आवश्यक है।

    (न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ) 

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