नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। चीन के उइगर मुस्लिमों की दास्‍तां किसी से छिपी नहीं रही है। इन लोगों को अपने ही देश में किस तरह की परेशानियों से जूझना पड़ रहा है इसको लेकर कई तरह की रिपोर्ट सामने आ चुकी हैं। चीन में रहने वाले इन लोगों पर संयुक्‍त राष्‍ट्र की रिपोर्ट भी बेहद चौंकाने वाली है। अब इनकी तरह ही वीगर मुस्लिम भी चीन की कम्‍यूनिस्‍ट तानाशाही का शिकार हो रहे हैं। आपको बता दें कि वर्षों पहले इनके पूर्वजों ने व्‍यापार के लिए अरब से चीन का रुख किया था। इसके बाद समय के साथ इन्‍होंने इसको ही अपना घर बना लिया। कहा तो यहां तक जाता है कि चीन में इस्‍लाम की शुरुआत के साथ ही ये यहां पर आए थे।

मुस्लिमों का हो रहा ब्रेनवॉश 

बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन मुस्लिमों का ब्रेनवाश किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन जिन शिविरों का जिक्र यह कहकर करता आया है कि वहां पर इन्‍हें तालीम दी जाती है वह दरअसल, कड़ी निगरानी वाले जेल हैं। इस तरह के जेलों में हजारों नहीं बल्कि लाखों की तादाद में वीगर मुस्लिम कैद हैं। इस तरह के शिविर चीन के शिनजियांग प्रांंत में हैं। लीक दस्‍तावेजों से उन देशों के आरोप सही साबित होते हैं जो इनके हक की आवाजें उठाते आए हैं। 

लीक दस्‍तावेजों से सामने आई बात

बीबीसी रिपोर्ट के यहां के जो दस्‍तावेज लीक हुए हैं उनके मुताबिक इन जेलों में वीगर मुस्लिमों को सजा और यातनाएं दी जाती हैं ताकि वह अपनी मजहबी सोच को बलपूर्वक बदल लें। इनके दिमाग में मुस्लिम सोच को निकालने के लिए हर संभव कोशिश की जाती है। बीबीसी के मुताबिक ब्रिटेन स्थित चीनी दूतावास इन रिपोर्ट्स का खंडन कर चुका है। इतना ही नहीं चीनी दूतावास ने इन खबरों को झूठी और मनघड़ंत बताया है। बीबीसी ने जिन दस्‍तावेजों का जिक्र किया है वह इंटरनेशनल कंजॉर्टियम ऑफ इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) को  मिले हैं, जिन्‍हें चाइना केबल्‍स कहा गया है । शिनजियांग में बने इन हिरासत केंद्रों में अधिकाशं वीगर मुस्लिम ही हैं। इन रिपोर्ट्स पर चीन की तरफ से कहा जा रहा है कि शिविरों में लोगों को कई तरह के प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं जिससे वह अपने पांव पर खड़े हो सकें।

तो बढ़ा दी जाए सजा 

जो दस्‍तावेज सामने आए हैं उनमें कम्युनिस्ट पार्टी के तत्कालीन उप-सचिव झू हैलून का वो पत्र भी है जो उन्‍होंने 2017 में एक शीर्ष अधिकारी को लिखा था। इसमें शिनजियांग के चीफ सिक्‍योरिटी ऑफिसर को कहा गया था कि इन शिविरों की सुरक्षा को ऐसा किया जाए जिससे यहां से कोई भी कैदी भाग न सके। इसके अलावा इस पत्र में यहां तक कहा गया था कि यदि शिविर में रहने वाला कोई व्‍यक्ति यदि हुक्‍म की नाफरमानी करे तो उसको सख्‍त सजा दी जाए। इतना ही नहीं इस खत में वीगर मुस्लिम कैदियों को लेकर हर तरह की चीज पर निर्देश दिए गए थे। आपको यहां पर ये भी बता दें कि चीन के शिनजियांग प्रांत में वर्ष 2017 में सात दिनों में करीब 15 हजार लोगों को इन शिविरों में जबरन भेजा गया था। 

मानवाधिकार का खुला उल्‍लंघन

उइगरों को लेकर सामने आई रिपोर्ट्स और दस्‍तावेजों के बाद चीन में मौजूद ह्यूमन राइट वॉच की डायरेक्‍टर सोफी रिचर्डसन ने यहां तक कह डाला है कि यह कार्रवाई के लिए पर्याप्‍त सुबूत हैं। उनका कहना है कि मानवाधिकार की बात करने वाला चीन पहले उइगरों और अब वीगर मुस्लिमों पर इनका खुला उल्‍लंघन कर रहा है। उन्‍होंने ये भी कहा है कि इन शिविरों में रहने वाला हर इंसान मानसिक उत्‍पीड़न का शिकार है। उसको ये भी नहीं पता है कि वह यहां से कब छूटेगा।   

हर कैदी को मिलते हैं नंबर

गौरतलब है कि इन शिविरों में रहने वाले कैदियों को बाकायदा नंबर दिए जाते हैं जो ये बताता है कि इनका कितना फीसद ब्रेनवॉश हुआ है। जिसके जितने ज्‍यादा नंबर होंगे उसको उतनी ही जल्‍दी यहां से जाने की इजाजत दी जाती है। बीबीसी की रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते कुछ माह में चीन ने जो 18 लाख लोगों को निगरानी में डाला था उसकी वजह ये थी कि उनके मोबाइल फोन में 'ज़प्या' नाम का डाटा शेयरिंग के लिए एक एप मौजूद था। ब्रिटेन में मौजूद चीन के राजदूत का अपना ही तर्क है। उनका कहना है कि चीन अपने लोगों की सुरक्षा को सुनिश्चित कर रहा है। उनके मुताबिक इस सख्‍ती की वजह से ही बीते कुछ वर्षों में चीन के अंदर कोई आतंकी हमला नहीं हुआ है। 

कई तरह की बंदिशें

आपको यहां पर बता दें कि चीन उइगरों पर भी आतंकी बताकर कार्रवाई करता आया है। चीन की सरकार और पीएलए ने उनकी मस्जिदों को तोड़ दिया है। यहां तक की कई जगहों पर उन्‍हें अपने धर्म के अनुसार अनुष्‍ठान करने तक की इजाजत नहीं है। इतना ही नहीं उन्‍हें दाढ़ी रखने की भी इजाजत कई जगहों पर नहीं दी गई है। अब यही सब कुछ वीगर मुस्लिमों के साथ ही शुरू हो गया है। 

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Posted By: Kamal Verma

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