नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। भारत ने जिस तरह से अंतरिक्ष में मौजूद अपने ही सेटेलाइट को Anti Satellite से नष्‍ट कर स्‍पेस में अपना डंका बजाया है वह अब चीन को रास नहीं आ रहा है। चीन को केवल भारत के इस सफल परीक्षण का ही दुख नहीं है बल्कि इस बात का भी दुख है कि जब उसने 2007 में पहली बार इसका परीक्षण किया था तब अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों ने उसकी निंदा की थी। लेकिन अब वही देश भारत के परीक्षण पर चुप्‍पी साधे हुए हैं। इसके अलावा चीन को इस बात का भी अफसोस है कि इस परीक्षण को लेकर अमेरिका ने भारत को केवल इतनी सी चेतावनी दी है कि इस परीक्षण से अंतरिक्ष में जो मलबा फैला है वह सही नहीं है। गौरतलब है कि भारत ने एक ही दिन पहले मिशन शक्ति के तहत पृथ्‍वी से करीब 300 किमी दूर अपनी ही एक सेटेलाइट को नष्‍ट कर दिया था। 

भारत से तुलना 

भारत के इस परीक्षण और पश्चिमी देशों के रुख पर चीन की सरकारी अखबार ग्‍लोबल टाइम्‍स के संपादकीय में जो लिखा है वह न केवल अपने आप में काफी हास्‍यास्‍पद है, बल्कि कई तरह के सवालों को भी जन्‍म दे रहा है।दरअसल, ग्‍लोबल टाइम्‍स ने लिखा है कि चीन की सरकार और यहां के लोग पश्चिम के दोहरे रवैये को काफी समय से देखते आए हैं, अब वह इसके आदी हो चुके हैं। अखबार के मुताबिक चीन 2007 में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था थी, जबकि भारत आज भी विकसित होने का ख्‍वाब संजाए है और विकासशील देशों की श्रेणी में आता है। इतना ही नहीं उसकी अर्थव्‍यवस्‍था भी चीन के मुकाबले काफी कम है।

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चीन की बराबरी करने में लगेगा समय  

चीन के इस अखबार ने भारत के बारे में जो बातें कहीं हैं वह भी गौर करने वाली हैं। अखबार लिखता है कि भारत का आर्थिक ढांचा बेहद कमजोर है और वहां पर अमीरों और गरीबों के बीच गहरी खाई है। पश्चिमी देश चीन के खिलाफ भारत को खड़ा करने के लिए तैयार कर रहे हैं। अखबार का यह भी कहना है कि अमेरिका और भारत के बीच कोई बराबरी नहीं है, दोनों के बीच में बहुत गहरी खाई है। भारत का सपना है कि वह अगले एक दशक में चीन की बराबरी कर ले। भारत के लोगों को यह भी गलतफहमी है कि उसकी सैन्‍य क्षमता के बढ़ने से चीन और पाकिस्‍तान उससे डर जाएंगे। लेकिन भारत को यह समझना चाहिए कि चीन की बराबरी करने के लिए उसको लंबा समय लगेगा।

हमले का कड़ा होगा जवाब

जहां तक चीन की बात है तो वह भारत से नहीं डरता है। यदि भारत उस पर हमला करने की कोशिश करेगा तो चीन का जवाब उसकी सोच से कहीं ज्‍यादा कड़ा  ही होगा। चीन मानता है कि भारत इस बारे में बखूबी जानता है। अखबार ने यह भी कहा है कि चीन ही नहीं पाकिस्‍तान भी भारतीयों की सोच से कहीं ज्‍यादा मजबूत और शक्तिशाली देश है। हम उम्‍मीद करते हैं कि भारत के लोग इस बात को भी समझते होंगे। ग्‍लोबलाइजेशन के दौर में भारत और चीन के विकास करने की राह अलग-अलग है, लेकिन इसके बाद भी उनकी मांग एक समान ही है। उनके निजी हित भी आपस में जुड़े हैं। लिहाजा दोनों एक दूसरे को शून्‍य न तो कर सकते हैं और न ही ऐसा सोच सकते हैं।

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