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    ट्रूडो गए, कार्नी आए… लेकिन भारत-कनाडा के रिश्तों में अब भी जमी बर्फ, आगे क्या होगा? विदेश मंत्रालय ने बताया

    Updated: Fri, 21 Mar 2025 08:16 PM (IST)

    कनाडा में सत्ता परिवर्तन के बावजूद भारत-कनाडा संबंधों में कोई बड़ा सुधार नहीं दिख रहा। भारत ने स्पष्ट किया है कि कनाडा में भारत विरोधी तत्वों पर ठोस कार्रवाई के बिना संबंध सामान्य नहीं होंगे। पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के भारत पर गंभीर आरोपों के बाद दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे। अब नई सरकार की ओर से भी कोई नीतिगत बदलाव के संकेत नहीं मिले हैं।

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    भारत और कनाडा के रिश्ते अब भी बेपटरी है। (फाइल फोटो)

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कनाडा से जस्टिन ट्रुडो की विदाई हो चुकी है। मार्क कार्नी नये प्रधानमंत्री के तौर पर काम शुरू कर चुके हैं। आगामी चुनाव की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। लेकिन कनाडा के साथ रिश्तों को सुधारने को लेकर भारत के रूख में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

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    भारत ने साफ कर दिया है कि भारत के हितों के खिलाफ काम करने वाले तत्वों पर ठोस कार्रवाई होने पर ही कनाडा के साथ रिश्तों में बड़े सुधार की उम्मीद जगेगी। वैसे कनाडा की नई सरकार की तरफ से भी कोई ऐसा संकेत नहीं आया है कि भारत के साथ रिश्तों को पटरी पर लाने के लिए मौजूदा नीतियों में बदलाव होगा। जानकार मान रहे हैं कि दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की कोशिश अब चुनाव बाद की नई सरकार ही करेगी।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि, “भारत और कनाडा के रिश्तों में गड़बड़ी तब हुई जब वहां अतिवादियों और अलगाववादियों को लाइसेंस दे दिया गया। हम उम्मीद करते हैं कि आपसी भरोसे और संवेदनशीलता के आधार पर रिश्तों को पुनर्जीवित करेंगे।''

    ट्रूडो ने भारत पर लगाया था लांछन

    पूर्व पीएम ट्रुडो ने वर्ष 2023 के अंत में भारत पर आरोप लगाया था कि यहां की एजेंसियों ने कुछ कनाडाई नागरिकों की हत्या करवाई है। इसमें हरजीत सिंह निज्जर की हत्या भी शामिल था। निज्जर एक खालिस्तानी आतंकवादी थी जिसकी तलाश भारत की जांच एजेंसियों को थी। बाद में यह विवाद इतना आगे बढ़ गया कि दोनों देशों ने अपने अपने उच्चायुक्तों को बुला लिया। भारत ने इन आरोपों का कड़ा विरोध करते हुए ट्रुडो को राजनीतिक वजहों से भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने तक का आरोप लगाया।

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