वाशिंगटन (एएनआई)। अमेरिका दक्षिण चीन सागर में अपने क्रैश हुए फाइजर जेट-35 के मलबे को जल्‍द से जल्‍द तलाश कर लेना चाहता है। उसकी कोशिश है कि इस जेट का मलबा किसी भी सूरत में चीन के हाथ न लग सके। आपको बता दें कि दक्षिण चीन सागर में क्रैश हुआ अमेरिका का ये फाइटर जेट बेहद एडवांस्‍ड था।अमेरिका के न्‍यूज नेटवर्क का कहना है कि चीन एफ-35 के मलबे को तलाशने की पूरी कोशिश कर रहा है। वहीं, अमेरिका अपने 100 करोड़ डालर के इस जेट के मलबे को भी चीन के हाथ नहीं जाने देना चाहता है। इसका इस्‍तेमाल बेहद खास आपरेशन में किया जाता है।

सीएनएन ने यूएस पैसिफिक फ्लीट के हवाले से बताया है कि हादसे की वजह जानने के लिए जांच चल रही है। आपको बता दें कि ये एफ-35 फाइटर जेट एक सिंगल इंजन वाला स्टिल्‍थ जेट है। ये दुश्‍मन के रडार से खुद को बचाकर रख सकता है। इसका अर्थ है कि इसके आसपास होने की जानकारी दुश्‍मन को नहीं लग सकती है। इसका इस्‍तेमाल अमेरिका समेत उसके सहयोगी देश जैसे जापान, ब्रिटेन, आस्‍ट्रेलिया भी करते हैं।

यहां पर ये भी जानना जरूरी है कि इस वर्ष एफ-35 के क्रैश होने की ये दूसरी घटना है। इससे पहले एफ-35 विमान ने दक्षिण कोरियाई एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग की थी। दक्षिण कोरियाई एयरफोर्स के मुताबिक, इसके लैंडिंग गियर में आई खराबी की वजह से ये हादसा हुआ था। पिछले वर्ष इस तरह की करीब आठ घटनाएं हुई थी।

अमेरिका जेट F-35 उस वक्‍त दुर्घटना का‍ शिकार हुआ था जब ये दक्षिण चीन सागर में तैनात यूएसएस कार्ल विंसन विमानवाहक पोत पर उतरने की तैयारी में था। समय रहते इस विमान के पायलट ने खुद को जेट से अलग कर लिया और बाद में पायलट को समुद्र में से हेलीकाप्‍टर द्वारा सुरक्षित निकाल लिया गया था। हालांकि इस हादसे में यूएसएस कार्ल विंसन पर मौजूद सात नौसेना के जवान घायल हो गए थे, जिनमें से तीन का इलाज फिलीपींस की राजधानी मनीला के मेडिकल ट्रीटमेंट फैसिलिटी सेंटर में और अन्‍यों का इलाज यूएसएस कार्ल विंसन पर ही किया जा रहा है।

रविवार को हुए इस हादसे की जानकारी यूएस नेवी ने दी थी। नेवी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, ये एफ-35 सी लाइटनिंग-2 केरियर एयर विंग 2, अमेरिका के विमानवाहक पोत यूएसएस कार्ल विंसन (सीवीएन 70) पर तैनात था और डेली रूटीन फ्लाइट पर था। यूएस नेवी द्वारा बताया गया था कि पायलट की हालत स्थिर है। गौरतलब है कि दक्षिण चीन सागर को लेकर अमेरिका और चीन के बीच जबरदस्‍त तनाव है। इस क्षेत्र में चीन समेत दूसरे देश भी अपना दावा करते आए हैं। वहीं, अमेरिका का कहना है कि ये स्‍वतंत्र क्षेत्र है, जिसमें किसी की आवाजाही को रोका नहीं जा सकता है।

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Edited By: Kamal Verma