अमेरिका ने फलस्तीनी राष्ट्रपति अब्बास को वीजा देने से किया इनकार, यूरोपीय देशों ने विरोध जताया
अमेरिका ने फलस्तीनी प्राधिकार के राष्ट्रपति महमूद अब्बास और 80 फलस्तीनी अधिकारियों को वीजा देने से मना कर दिया है जिससे संयुक्त राष्ट्र आमसभा की बैठक में उनकी भागीदारी संदिग्ध हो गई है। अमेरिका का यह फैसला फलस्तीनी मुक्ति संगठन से जुड़े अधिकारियों पर लागू होता है और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के मद्देनजर लिया गया है। यूरोपीय देशों ने इस फैसले की निंदा की है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका ने फलस्तीनी प्राधिकार के राष्ट्रपति महमूद अब्बास और करीब 80 फलस्तीनी अधिकारियों को वीजा देने से इन्कार कर दिया है। अमेरिका नहीं चाहता है कि अब्बास सितंबर में होने वाली संयुक्त राष्ट्र आमसभा की बैठक में हिस्सा लें। इस बैठक के दौरान अमेरिका के कई सहयोगी देशों-फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा और आस्ट्रेलिया ने स्वतंत्र फलस्तीन को मान्यता देने का फैसला किया है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने बताया है कि अब्बास और करीब 80 अधिकारियों के वीजा आवेदनों को अस्वीकार किया गया है। ये सभी फलस्तीनी मुक्ति संगठन और फलस्तीनी प्राधिकार से जुड़े हुए हैं। यह फैसला अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को ध्यान में रखकर किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में होगी आमसभा की बैठक
आमसभा की बैठक संयुक्त राष्ट्र के न्यूयार्क स्थित मुख्यालय में होनी है। उसमें भाग लेने के लिए आने को अमेरिकी वीजा की जरूरत होगी। फलस्तीनी प्राधिकार ने अमेरिका के फैसले पर हैरानी जताते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। कहा कि संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय समझौते के अनुसार किसी भी मान्यताप्राप्त देश को महासभा की बैठक में भाग लेने से रोका नहीं जा सकता है।
यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों ने अमेरिकी फैसले की निंदा की
प्राधिकार ने अमेरिका से अनुरोध किया है कि वह फलस्तीनियों का सहयोग करे और राष्ट्रपति अब्बास व अधिकारियों को संयुक्त राष्ट्र आमसभा की बैठक में भाग लेने दे। डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में शनिवार को यूरोपीय संघ की बैठक में भाग लेने आए यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों ने अमेरिकी फैसले की निंदा की है।
स्पेन के प्रधानमंत्री ने महमूद अब्बास से बात की
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने इस मसले पर महमूद अब्बास से फोन पर बात की है और अमेरिकी फैसले को अन्यायपूर्ण बताते हुए फलस्तीनियों की मांग क समर्थन करने का एलान किया है। एक्स पर पोस्ट संदेश में सांचेज ने कहा, फलस्तीन को संयुक्त राष्ट्र सहित सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी बात कहने का अधिकार है।
इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने कहा है कि संगठन इस विषय पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय से बात करेगा।
इससे पहले 1988 में अमेरिका ने फलस्तीनी मुक्ति संगठन के नेता यासेर अराफात को संयुक्त राष्ट्र आमसभा की बैठक में भाग लेने के लिए वीजा देने से इन्कार कर दिया था। उसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने अपनी बैठक न्यूयार्क के स्थान पर स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में की थी और उसे अराफात ने संबोधित किया था।
(समाचार एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)
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