जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। संसद, पठानकोट और पुलवामा जैसे हमलों को अंजाम देने वाले आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया गया है। पिछले एक दशक से अजहर के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र की तरफ से प्रतिबंध घोषित करवाने मे जुटे भारत की कूटनीतिक कोशिशों को बुधवार को सफलता तब मिली जब चीन ने अपना वीटो पावर हटा कर इसका समर्थन कर दिया।

पीएम नरेंद्र मोदी ने इसे भारत की एक बड़ी जीत बताते हुए कहा है कि इससे आतंकवाद को जड़ से मिटाने की कोशिशों को मदद मिलेगा। इस फैसले से पाकिस्तान के भी बोल बदल गये हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह अजहर के बारे में यूएन के फैसले को तुरंत लागू करेगा।संयुक्त राष्ट्र की तरफ से अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने के लिए एक विशेष समिति बना रखी है जिसे 1267 अल कायदा प्रतिबंध समिति के नाम से जाना जाता है।

इस समिति के तहत घोषित आतंकियों को किसी भी देश में शरण देना ना सिर्फ मुश्किल होता है बल्कि उसके लिए फंड जुटाना भी मुश्किल होता है। साथ ही मसूद अजहर के नाम से जुड़े हर बैंक खाते और संपत्तियों को जब्त कर लिया जाएगा। उस व्यक्ति और उससे जुड़े हर तरह के संगठन की कड़ी निगरानी की जाती है और उनके बारे में संयुक्त राष्ट्र के तमाम देशों के साथ सूचनाएं भी साझा करनी पड़ती है।

बुधवार को संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत व स्थाई प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने यह जानकारी दी कि, ''मसूद अजहर यूएन की तरफ से आतंकी घोषित हो गया है। इसमें सभी बड़े छोटे देशों ने मदद की है। उन सभी देशों को मदद के लिए धन्यवाद।''पीएम नरेंद्र मोदी ने भी देर शाम राजस्थान के जयपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने पर संतोष जताया। इसे आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने की भारत की कोशिशों का नतीजा बताते हुए यह भी कहा कि, ''अजहर का मुद्दा अभी शुरुआत है। देखते रहिए आगे क्या क्या होता है।''

साफ है कि मसूद अजहर अब आगे चुनाव में भी मुद्दे के तौर पर उभरेगा। वैसे ही इस चुनाव में राष्ट्रवाद और पाकिस्तान केंद्रित आतंकियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक व बालाकोट जैसे मुद्दे पहले से ही केंद्र में है।बहरहाल, संयुक्त राष्ट्र में भारत की कोशिशें इसलिए सफल रही कि चीन ने मार्च, 2019 में अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस की तरफ से लाये गये प्रस्ताव के खिलाफ तकनीकी रोक (वीटो) वापस ले लिया। इस बारे में चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि, संयुक्त राष्ट्र में पेश संशोधित प्रस्तावों का नए सिरे से अध्ययन करने के बाद तकनीकी रोक हटाया गया है।

चीन ने यह भी कहा है कि उसने प्रस्ताव में कोई आपत्ति नहीं दिखी है। चीन ने यह भी दिखाने की कोशिश है कि वह अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर सभी देशों के साथ सहयोग करने को तैयार रहता है। चीन ने अपने बयान में पाकिस्तान का भी जिक्र किया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ लगातार काम कर रहा है और उसके योगदान को स्वीकार किया जाना चाहिए। दूसरी तरफ, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि, वह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव को तुरंत लागू करेगा।

पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि चूंकि यूएन में पेश संशोधित प्रस्ताव में मसूद अजहर को किसी राजनीतिक मुद्दों से नहीं जोड़ा गया है और उसे पुलवामा हमले से भी संबंधित नहीं किया गया है। पारित उक्त प्रस्ताव में कश्मीर का जिक्र नहीं है। हालांकि इसका कोई खास मतलब नहीं है क्योंकि भारत का मुख्य उद्देश्य अजहर पर प्रतिबंध लगाने का था और वह हो गया है। प्रस्ताव लाने वाले देश फ्रांस ने इसका स्वागत किया है।

चीन व पाकिस्तान की तरफ से बचाव के बावजूद यह भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। यह सिर्फ चीन के मिजाज में बदलाव के हिसाब से ही नहीं बल्कि इस मुद्दे पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी 15 देशों का सहयोग हासिल किया है वह भी सरकार की कूटनीतिक क्षमता को दर्शाता है। वर्ष 2009 में पहली बार भारत ने अजहर के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया था। उसके बाद चार बार ऐसा प्रस्ताव पेश हो चुका है और हर बार चीन उसे वीटो लगा कर खारिज करवाता रहा है।

मसूद अजहर ऐसे बना था आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्‍मद का सरगना
 

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Posted By: Ayushi Tyagi

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