Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    वीरान स्‍कूल, बंद रेस्तरां और बेहाल अस्पताल; क्या 'जीरो इमिग्रेशन'से अपना ही गला घोंट रहा है अमेरिका?

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 06:05 PM (IST)

    US Zero Immigration Policy: राष्ट्रपति ट्रंप की 'जीरो इमिग्रेशन' नीति अमेरिका के लिए बड़ा आर्थिक संकट पैदा कर रही है। अस्पतालों में नर्सों, स्कूलों में ...और पढ़ें

    Hero Image

    ट्रंप की 'जीरो इमिग्रेशन' नीति बनी गले की हड्डी, न डॉक्टर मिल रहे, न मजदूर। एआई जेनरेटेड फोटो

    स्मार्ट व्यू- पूरी खबर, कम शब्दों में

    डिजिटल डेस्‍क, न्‍यूयॉर्क/नई दिल्‍ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में 'अमेरिका ग्रेट अगेन' के स्‍लोगन के तहत  'जीरो इमिग्रेशन' पॉलिसी लागू की। यह पॉलिसी अब अमेरिका के लिए बोझ बनती जा रही है।

    अमेरिका में साल 2024 में विदेश में जन्मी आबादी 14.8 फीसदी थी, यह संख्या 1890 के बाद सबसे अधिक थी। ट्रंप के सत्ता संभालते ही प्रशासन ने बॉर्डर सीलकर दिए। शरणार्थियों के प्रवेश पर रोक लगा दी।  नए आने वालों तथा लंबे समय से रह रहे लोगों को बाहर जाने के लिए मजबूर कर रहा है।

    मौजूदा वक्त में अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) के एजेंट शहरों से लेकर गांवों तक में आक्रामक तलाशी अभियान चला रहे हैं, जिससे कमाने-खाने अमेरिका गए विदेशी लोग दहशत में हैं। इसी का परिणाम है कि सालाना शुद्ध आव्रजन (Net Immigration) 20 से 30 लाख घटकर महज 4.5 लाख रह गया।

    अमेरिका में पड़ने लगा कामगारों का टोटा

    बाइडन प्रशासन के तहत दी गई अस्थायी कानूनी राहत को रद करने से लाखों लोगों के सामने किसी भी समय निष्कासन का खतरा मंडरा रहा है। ट्रंप प्रशासन अब तक छह लाख लागों को देश से बाहर निकाल चुका है।

    Zero Immigration

    इसका सीधा असर जमीन पर नजर आ रहा है। अस्‍पतालों में डॉक्टर और नर्स नहीं मिल रहे हैं। वीजा शुल्क बढ़ने के चलते स्‍कूलों /कॉलेज/यूनिवर्सिटी में छात्र की संख्या घट रही है। काम करने वाले लोग न मिलने के चलते रेस्‍तरां बंद हो रहे हैं और खेतों में फसलें खतरे में हैं।

    • लुइसियाना की निर्माण कंपनियां बढ़ई ढूंढने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
    • वेस्ट वर्जीनिया के अस्पतालों को विदेशों से आने वाले डॉक्टर और नर्स नहीं मिल पा रहे हैं।
    • टेनेसी के मेम्फिस में स्थानीय फुटबाल लीग में पर्याप्त टीमें नहीं बन पा रही हैं क्योंकि अप्रवासी बच्चे आना बंद कर चुके हैं।

    अमेरिका को लेकर क्‍या कर रहे एक्‍सपर्ट?

    इस जमीनी हकीकत को लेकर अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह साल 1992 के दशक में अमेरिका ने खुद को अलग-थलग कर लिया था, उसी तरह एक बार फिर अमेरिका खुद को दुनिया से काट रहा है। उस समय जैसे- उद्योग सिकुड़े थे, आज भी वही हालात बन रहे हैं।
     
    अर्थशास्त्री आगाह कर रहे हैं कि अभी जो अमेरिका का माहौल है, उससे देश में हर बीतते दिन के साथ मजदूरों की कमी हो रही है। मजदूरों की कमी से महंगाई बढ़ेगी। सेवाएं घटेंगी और अमेरिका की 'लैंड ऑफ ऑपर्चुनिटी' वाली छवि चकनाचूर हो जाएगी।
     

    अमेरिका में कौन-से सेक्‍टर सबसे अधिक प्रभावित?

    हेल्‍थ: डॉक्‍टर और नर्स नहीं मिल रहे, संकट में मरीज

    अमेरिका का हेल्थ सिस्टम इस नीति से सबसे पहले चरमराया है। वेस्ट वर्जीनिया जैसे रिपब्लिकन राज्यों में 20 प्रतिशत नर्सिंग पद खाली हैं। हर तीन में से एक डॉक्टर विदेश में पढ़ा हुआ है, लेकिन अब वीजा डर के कारण वे अमेरिका आने से इनकार कर रहे हैं।
     
    वैंडालिया हेल्थ नेटवर्क (Vandalia Health Network) के मुताबिक, सिर्फ एक साल में दो कार्डियोलॉजिस्ट चले गए क्योंकि उन्हें भरोसा नहीं था कि वे स्थायी रूप से रह पाएंगे।
     
    Zero Immigration Docter in US inside
     
    एआई जेनरेटेड फोटो
     
     
    अस्पताल मानते हैं कि यह सिर्फ स्टाफिंग इश्यू नहीं, बल्कि मरीजों की जान का सवाल है। ग्रामीण इलाकों में पहले से ही डॉक्टरों की कमी थी। अब डिलीवरी, इमरजेंसी और बुजुर्गों की देखभाल जैसे जरूरी कामों के लिए स्टाफ नहीं मिल रहा।
     
    स्वास्थ्य विशेषज्ञ साफ कहते हैं -
     मशीनें इलाज नहीं कर सकतीं, इंसान चाहिए। अगर आव्रजन नीति में बदलाव नहीं हुआतो आगामी सालों में अमेरिका का हेल्थ सिस्टम चरमरा जाएगा।
     

    एजुकेशन: स्कूल में बच्चे नहीं तो खतरे में टीचर्स की जॉब

     
    ट्रंप प्रशासन की नियमों को लेकर सख्ती का ही असर है कि लॉस एंजिलिस व न्यूयॉर्क में प्रवासी परिवार डर के मारे बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर रहे हैं। स्कूलों में छात्र संख्या तेजी से घट गई है और शिक्षकों की नौकरियां खतरे में हैं।
     
    Zero Immigration Student in US
     
    वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या घटने से कॉलेजों का बजट बिगड़ रहा है। विदेशी छात्र पूरी फीस देते थे, जिससे अमेरिकी शिक्षा तंत्र चलता था।
     

    रेस्‍तरां: कुक और मैनेजर नहीं मिल रहे; लागत बढ़ रही

    अमेरिका के कई राज्‍यों में रेस्‍तरां, शॉपिंग मॉल और लोकल मार्केट में काम करने वाले हजारों प्रवासी अब गायब हो रहे हैं। रेस्तरां चेन तजिकी के सीईओ डैनसिम्पसन ने बताया कि कुक, डिशवॉशर और मैनेजर नहीं मिल रहे। इसलिए दुकानें सीमित समय के लिए खुल रही हैं।
     
    कारोबारियों की मानें तो मजदूरों की कमी से लागत बढ़ रही है और कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी।
     

    कृषि: नहीं मिल रहे मजदूर, टूट रही सप्लाई चेन

     
    अमेरिकी खेती प्रवासी मजदूरों पर टिकी है। डेयरी, सब्जी और मांस प्रोसेसिंग यूनिट्स में मजदूर संकट है। पेंसिल्वेनिया के किसान ल्यूक कहते हैं कि 10 लोगों की जरूरत हो तो शायद एक अमेरिकी आवेदन करे। उत्पादन घट रहा है, जिससे सप्लाई चेन टूट रही है।
     
    Zero Immigration farming in US inside
     
    विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि खाने-पीने की चीजें महंगी होंगी और कुछ उत्पाद बाजार से गायब हो सकते हैं।
     

    चिंतित प्रवासी क्‍या बोले?

    अमेरिका में काम नहीं मिल रहा है। हालात ऐसे कि देश लौटना भी मुश्किल है। आयोवा के मार्शलटाउन में रहने वाले यूक्रेनी इंजीनियर सर्गेई फेडको की नौकरी, घर और बच्चों की पढ़ाई सब ठीक चल रही थी। जिंदगी अमेरिका में अच्‍छे से सेटल थी, लेकिन ट्रंप की नई नीति ने सब अधर में लटका दिया। पैरोल बढ़ाने के लिए 1,000 डॉलर फीस देनी पड़ी।

    वह बताते हैं कि पत्नी का मामला अब भी अधर में है। अगर पत्नी का वर्क परमिट गया तो डे-केयर सेंटर में बच्चों की देखभाल और मुश्किल होगी। हैती, क्यूबा और वेनेजुएला से आए हजारों लोग न तो काम कर पा रहे हैं, न ही अपने देश लौट सकते हैं। वे सिस्टम के बाहर धकेल दिए गए हैं।

    यह भी पढ़ें- लॉस एंजिलिस, शिकागो और पोर्टलैंड से नेशनल गार्ड को बुलाया गया वापस, अचानक ट्रंप ने क्यों लिया इतना बड़ा फैसला?
     

    Source: www.nytimes.com
     
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें