माइक्रोसॉफ्ट ने इजरायल को बेची थी AI और क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाएं, गाजा पर हमले में हुआ इस्तेमाल; कंपनी ने स्वीकार की ये बात
माइक्रोसॉफ्ट ने माना है कि उसने गाजा युद्ध के दौरान इजरायली सेना को एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाएं दीं जिससे बंधकों को ढूंढने में मदद मिली। हालांकि कंपनी को इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिला है कि उसके एआई का इस्तेमाल गाजा में लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया। माइक्रोसॉफ्ट ने इजरायली सरकार के साथ साइबर सुरक्षा में भी सहयोग किया है।

एपी, वाशिंगटन। दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने गुरुवार को स्वीकार किया है कि उसने गाजा में युद्ध के दौरान इजरायली सेना को एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाएं बेची थीं। इसने बंधकों का पता लगाने और उन्हें बचाने के प्रयासों में सहायता की है।
लेकिन उसे आज तक इस बात का कोई सुबूत नहीं मिला है कि उसके एज्योर प्लेटफॉर्म और एआई का इस्तेमाल गाजा में लोगों को निशाना बनाने या नुकसान पहुंचाने के लिए किया गया हो। यह युद्ध में कंपनी की भागीदारी की पहली सार्वजनिक स्वीकृति है।
निगरानी के लिए एज्योर का उपयोग
करीब तीन महीने पहले सामने आया था कि माइक्रोसॉफ्ट की इजराइली रक्षा मंत्रालय के साथ घनिष्ठ साझेदारी है और हमास हमले के बाद एआई का सैन्य उपयोग काफी बढ़ गया। इजरायली सेना बड़े पैमाने पर निगरानी के माध्यम से एकत्र जानकारी के विश्लेषण के लिए एज्योर का उपयोग करती है।
मानवाधिकार समूहों ने चिंता जताई कि एआई प्रणालियां त्रुटिपूर्ण हो सकती हैं, लेकिन इनका उपयोग यह निर्णय लेने में किया जा रहा है कि किसे या किस चीज को लक्षित किया जाए। इससे निर्दोष लोगों की मौत हो रही है।
माइक्रोसॉफ्ट ने प्रदान की सेवा
- कंपनी ने कहा कि उसने इजरायली सेना को सॉफ्टवेयर, पेशेवर सेवाएं, एज्योर क्लाउड स्टोरेज और एआई सेवाएं प्रदान कीं। साथ ही बाहरी खतरों से इजरायली साइबरस्पेस की सुरक्षा के लिए उसकी सरकार के साथ मिलकर काम किया।
- हमारा मानना है कि कंपनी ने सिद्धांतों का सावधानी से और सोच समझकर पालन किया ताकि बंधकों को बचाने में मदद मिल सके और गाजा में आम नागरिकों की गोपनीयता का सम्मान भी किया जा सके।
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