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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 04, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

अमेरिका को 'Love You' बोलकर देश से निकल गई ये भारतीय लड़की, वायरल वीडियो में बताई चौंकाने वाली बात

Published: Sat, 04 Oct 2025 03:24 PM (IST)

भारतीय युवती अनन्या जोशी का अमेरिकन ड्रीम नौकरी और वीजा समस्या के चलते अधूरा रह गया। F-1 वीजा पर अमेरिका ...और पढ़ें

वायरल वीडियो में बताई चौंकाने वाली बात (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
वायरल वीडियो में बताई चौंकाने वाली बात (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)

HighLights

  1. भारतीय युवती अनन्या जोशी को वीजा और नौकरी संकट के कारण अमेरिका छोड़ना पड़ा।
  2. अनन्या ने छात्रों को यूरोप और एशिया में भी अवसर तलाशने की सलाह दी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। 'अमेरिकन ड्रीम' हर किसी के लिए सच नहीं हो पाता है। भारतीय युवती अनन्या जोशी के लिए यह सपना अधूरा रह गया। नौकरी न मिलने और वीजा संबंधी परेशानियों के चलते उन्हें अमेरिका छोड़ना पड़ा। जाते वक्त उन्होंने भावुक होकर सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया।

अनन्या ने बताया कि वह अमेरिका में F-1 वीजा पर पढ़ाई कर रही थी और पढ़ाई पूरी करने के बाद ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) के तहत नौकरी ज्वाइन की थी।

कंपनी ने उन्हें भरोसा दिया था कि वे ई-वैरिफाइड हैं, जिससे अनन्या अपने STEM OPT एक्सटेंशन पर काम जारी रख सकती थी। लेकिन बाद में पता चला कि कंपनी ई-वैरिफाइड नहीं है। इस वजह से अनन्या एक्सटेंशन के लिए आवेदन नहीं कर सकीं और कंपनी ने उन्हें निकाल दिया।

दिए 20-30 इंटरव्यू

उन्होंने बताया कि दो महीने में उन्होंने 20-30 इंटरव्यू दिए, लेकिन हर जगह यही जवाब मिला कि उन्हें ग्रीन कार्ड या सिटिजनशिप वाले उम्मीदवार चाहिए। OPT पर काम करने वालों को कोई रखने को तैयार नहीं था। 29 सितंबर को अनन्या ने इंस्टाग्राम पर अपना विदाई वीडियो शेयर किया और लिखा, "अमेरिका मेरा पहला घर था जहां में आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनी। यह हमेशा खास रहेगा। हालांकि, छोटा सा सफर रहा, लेकिन मैं इसे हमेशा याद रखूंगी।"

अनन्या ने इन देशों का भी दिया ऑप्शन

अनन्या ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की वीजा पॉलिसियों ने हालात और मुश्किल बना दिए हैं। अब तो कॉन्ट्रैक्ट रोल्स में भी OPT वाले छात्रों को नौकरी नहीं मिल रही है। उन्होंने भारतीय छात्रों को सलाह दी कि दुनिया सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि स्विट्जरलैंड, जर्मनी, बेल्जियम और सिंगापुर जैसे देशों में भी बायोटेक्नोलॉजी में अवसर बढ़ रहे हैं।

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