Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    'पुतिन अगर जेलेंस्की को पकड़ लें तो...', वेनेजुएला पर हमले को लेकर अमेरिका में ही घिरे ट्रंप

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 10:08 PM (IST)

    भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने वेनेजुएला में सैन्य बल के इस्तेमाल और राष्ट्रपति ट्रंप के 'अमेरिका वेनेजुएला चलाएगा' बयान की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    सांसदों ने चेतावनी दी कि इस कार्रवाई में संसद को दरकिनार किया गया है

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय अमेरिकी सांसदों ने वेनेजुएला में सैन्य बलों का इस्तेमाल करने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कदम और उनके इस बयान की कड़ी आलोचना की है कि उस देश को अमेरिका चलाएगा। छह भारतीय अमेरिकी सांसदों (सभी विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के) ने चेतावनी दी कि इस कार्रवाई में संसद को दरकिनार किया गया है और राष्ट्रपति के अधिकारों की संवैधानिक सीमाओं का अतिक्रमण किया गया है।

    खुफिया मामलों पर संसद की स्थायी प्रवर समिति के वरिष्ठ सदस्य राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि निकोलस मादुरो का रिकार्ड एकतरफा सैन्य कार्रवाई को सही नहीं ठहराता। उन्होंने कहा, ''मादुरो एक अवैधानिक तानाशाह था जिसने वेनेजुएला के लोगों को बहुत दुख दिया, लेकिन यह सच्चाई किसी भी राष्ट्रपति को संसद की अनुमति के बिना सैन्य बल का इस्तेमाल करने का खुला अधिकार नहीं देती।''

    कहा कि बिना अनुमति के कार्रवाई करना और दूसरे संप्रभु राष्ट्र पर अमेरिकी नियंत्रण जताना सत्ता का दुरुपयोग है। संसद की अनुमति के बिना कार्रवाई करके और सार्वजनिक रूप से दूसरे संप्रभु राष्ट्र पर अमेरिकी नियंत्रण जताकर, ट्रंप राष्ट्रपति की शक्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं और संविधान के तहत शक्तियों के बंटवारे को कमजोर कर रहे हैं। कृष्णमूर्ति ने कहा, ''प्रशासन को तुरंत अमेरिकी कर्मियों की सुरक्षा के बारे में बताना चाहिए, यह बताना चाहिए कि क्या कोई हताहत हुआ है और संसद को तुरंत एवं पूरी जानकारी देनी चाहिए।''

    उन्होंने कहा कि ट्रंप का यह बयान कि अमेरिका वेनेजुएला को चलाएगा, बिना मंजूरी के देश को जिम्मेदारी के लिए प्रतिबद्ध करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह कदम कानून के शासन को कमजोर करेगा, रूस व चीन को अन्य जगहों पर सीमाएं लांघने के लिए प्रोत्साहित करेगा, अमेरिका की विश्वसनीयता को कमजोर करेगा और अंतत: अमेरिकियों की सुरक्षा में कमी लाएगा।

    सैन्य और विदेश मामलों की निगरानी उपसमिति के सदस्य सुहास सुब्रमण्यम ने कहा कि यह अभियान नए युद्धों के प्रति ट्रंप के घोषित विरोध के विपरीत था। उन्होंने कहा, ''राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि वह शांति के राष्ट्रपति होंगे और कोई नया युद्ध शुरू नहीं करेंगे, इसके बावजूद उन्होंने गैरकानूनी तरीके से दूसरे देश पर हमला किया और उसके राष्ट्रपति का अपहरण कर लिया।''

    मादुरो को अपने देश में लोकतंत्र का दमन करने वाला हिंसक शासक बताते हुए सुब्रमण्यम ने कहा कि उन्हें पकड़ने के तरीके से अमेरिकी लक्ष्य हासिल नहीं होंगे। इससे न तो ड्रग्स का फ्लो रुकेगा एवं न ही वेनेजुएला में और अधिक अस्थिरता के अलावा कुछ मिलेगा। संभवत: झूठे बहाने से एक और कभी न खत्म होने वाला युद्ध शुरू हो जाएगा। सांसद प्रमिला जयपाल ने कहा, ''ट्रंप ने अमेरिका को युद्धों से निकालने का वादा किया था, उन्होंने झूठ बोला था। यह सैन्य कार्रवाई पूरी तरह से तेल, लालच और सत्ता के लिए की गई।''

    एक अलग पोस्ट में उन्होंने वेनेजुएला के लोगों के बजाय अमेरिका द्वारा उसके नेतृत्व का फैसला करने पर सवाल उठाया। सांसद एमी बेरा ने कहा कि मादुरो अवैधानिक थे, लेकिन संसद की सहमति के बिना हमला करने का फैसला बेहद चिंताजनक और गैरकानूनी था। साथ ही उन्होंने शासन या लोकतांत्रिक बदलाव के लिए स्पष्ट और विश्वसनीय रणनीति की कमी का भी जिक्र किया। श्री थानेदार ने कहा कि केवल संसद के पास ही युद्ध की घोषणा करने का अधिकार है। उन्होंने ट्रंप के कदम को पूरी तरह असंवैधानिक और अस्वीकार्य बताया।

    'पुतिन अगर जेलेंस्की को पकड़ना चाहें तो...'

    डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना ने कहा कि ट्रंप ने वेनेजुएला में सत्ता बदलने के लिए अमेरिका को फिर महान बनाने की अपनी बुनियाद से धोखा किया है। हम इराक, अफगानिस्तान और लीबिया में बेवकूफी भरे युद्धों के विरुद्ध वोट देते रहते हैं। लेकिन हमारे राष्ट्रपति सैन्यवाद के प्रति समर्पित विदेश नीति लाबी के आगे झुक जाते हैं।

    खन्ना ने पूछा, ''अब हम क्या कहेंगे अगर शी चिनफिंग ताइवान के लाई को पकड़ना चाहें या व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन में जेलेंस्की को पकड़ने की कोशिश करें?''

    (न्यूज एजेंसी आईएएनएस के इनपुट के साथ)