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    फलस्तीन को मिला भारत का साथ, UN में इजरायल के खिलाफ किया वोट; 157 देशों ने किया समर्थन

    Updated: Wed, 04 Dec 2024 04:29 PM (IST)

    UN Resolution फलस्तीन पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव के समर्थन में भारत ने मतदान किया। अमेरिका समेत कुल आठ देशों ने प्रस्ताव का विरोध किया। वहीं सात देशों ने मतदान से दूरी बनाए रखी। प्रस्ताव को भारत समेत कुल 157 देशों का साथ मिला। प्रस्ताव में फलस्तीन के क्षेत्र से इजरायली कब्जे को हटाने की मांग की गई है।

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    फलस्तीन पर प्रस्ताव बहुमत से पास। ( फाइल फोटो )

    पीटीआई, संयुक्त राष्ट्र। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। इसमें पूर्वी यरुशलम समेत 1967 से कब्जे वाले फलस्तीनी क्षेत्र से इजरायल की वापसी का आह्वान किया गया था। साथ ही पश्चिम एशिया में व्यापक, न्यायसंगत और स्थायी शांति पाने के आह्वान को दोहराया गया। सेनेगल द्वारा पेश फलस्तीन के प्रश्न का शांतिपूर्ण समाधान का मसौदा प्रस्ताव मंगलवार को 193 सदस्यीय महासभा में भारी बहुमत से अपनाया गया।

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    इन देशों ने प्रस्ताव के खिलाफ किया मतदान

    भारत उन 157 देशों में शामिल था, जिन्होंने इसके पक्ष में मतदान किया। वहीं, अर्जेंटीना, हंगरी, इजरायल, माइक्रोनेशिया, नाउरू, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी और अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया। कैमरून, चेकिया, इक्वाडोर, जार्जिया, पैराग्वे, यूक्रेन और उरुग्वे अनुपस्थित रहे।

    जनसांख्यिकीय बदलाव की कोशिश को किया खारिज

    प्रस्ताव में प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र संकल्पों के आधार पर बिना किसी देरी के पश्चिम एशिया में व्यापक, न्यायसंगत और स्थायी शांति की बहाली के लिए अपना आह्वान दोहराया। प्रस्ताव के माध्यम से महासभा ने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर शांति और सुरक्षा के साथ इजरायल और फलस्तीन के दो देश समाधान के लिए अपने समर्थन की पुष्टि की। साथ ही गाजा पट्टी में जनसांख्यिकीय या क्षेत्रीय परिवर्तन के किसी भी प्रयास को खारिज कर दिया।

    इजरायल अपने दायित्वों का करे पालन

    प्रस्ताव के माध्यम से महासभा ने अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर शांति व सुरक्षा के साथ रहने वाले इजरायल और फलस्तीन के दो राज्य समाधान पर अपने समर्थन की पुष्टि की। प्रस्ताव में यह भी मांग की गई है कि कि इजरायल अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों का सख्ती से पालन करे।

    इजरायल के दायित्वों का उल्लेख 19 जुलाई 2024 के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की सलाहकार राय में है। इसमें कहा गया था कि इजरायल कब्जे वाले फलस्तीनी क्षेत्र में अपनी गैरकानूनी उपस्थिति को जल्द से जल्द समाप्त करे। सभी नई बस्तियों को तुरंत रोके और कब्जे वाले फलस्तीनी क्षेत्र से सभी बसने वालों को निकाले। इसमें इजरायल के गैर-कानूनी कृत्यों को समाप्त करने को कहा गया था।

    गाजा पट्टी फलस्तीन का अभिन्न अंग

    प्रस्ताव में कहा कि गाजा पट्टी 1967 में कब्जे वाले फलस्तीन का एक अभिन्न अंग है। प्रस्ताव में सैन्य हमलों, विनाश और आतंकी गतिविधियों समेत हिंसा के सभी कृत्यों के साथ-साथ उकसावे और उत्तेजना को तत्काल और पूर्ण रूप से समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

    भारत ने महासभा में एक और प्रस्ताव के पक्ष में भी मतदान किया है। इस प्रस्ताव में गोलन हाइट्स से इजरायल को कब्जा छोड़ने को कहा गया है। इस प्रस्ताव को 97 मतों के साथ पारित किया गया। 64 देशों ने मतदान से परहेज किया और आठ ने खिलाफ मतदान किया। खिलाफ मतदान करने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इजरायल, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका शामिल हैं।

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