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जेनेवा, एजेंसी। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 42वें सत्र में भारत ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के कथित मानवाधिकार उल्लंघन के दावों को खारिज कर दिया। भारत ने इस दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आश्वस्त कराया कि कश्मीर में तेजी से हालात समान्य हो रहे हैं। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के एक महीने बाद हालात में काफी समान्य हुआ है।  

इस दौरान भारत ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि कश्मीर के हालात पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उसे मानवाधिकार को लेकर खुद का रिकॉर्ड देखना चाहिए। पाकिस्तान खुद को पीड़ित बताता है जबकि असलियत में वो अपराधी है।  

तेजी से सुधर रहे हालात
संयुक्त राष्ट्र की इस बैठक में भारतीय राजनयिक विजय ठाकुर सिंह ने कहा, 'चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद, जम्मू कश्मीर में प्रशासन बुनियादी सुविधाओं, आवश्यक चीजों की आपूर्ति, संस्थानों के सामान्य कामकाज, गतिशीलता और कनेक्टिविटी को सुनिश्चित कर रहा है। इसके अलावा क्षेत्र में प्रतिबंधों को लगातार कम किया जा रहा है।'

एहतियात के तौर पर कदम उठाया 
सिंह ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि कश्मीर पर सरकार के फैसले के बाद एहतियात के तौर पर इस कदम की काफी आवश्यकता थी। इसका सबसे बड़ा कारण सीमा पार से आतंकवाद से घाटी के नागरिकों पर खतरा है।

कश्मीर के विकास के लिए लिया गया फैसला
कश्मीर से अनुच्छेद 370 जाने के भारत सरकार के फैसले का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया ताकि देश के अन्य हिस्सों के लोगों की तरह घाटी के लोगों को भी समान पर संवैधानिक लाभ मिले। कश्मीर के लोगों के विकास के लिए ये कदम काफी जरूरी था। 

भेदभाव भी समाप्त होगा 
उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप, संपत्ति के अधिकार और स्थानीय निकायों के प्रतिनिधित्व सहित विभिन्न मुद्दों में लैंगिक भेदभाव का अंत होगा। घरेलू हिंसा के खिलाफ कानूनों का बेहतर तरीके से पालन होगा। शिक्षा और सूचना के अधिकार अब लागू होंगे। शरणार्थियों और कम विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों के खिलाफ लंबे समय से हो रहा भेदभाव भी समाप्त हो जाएगा। 

भारत का आंतरिक निर्णय 
उन्होंने कहा 'कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने और जम्मू कश्मीर को दो भाग (जम्मू कश्मीर और लद्दाख) में बांटने का फैसला लोकसभा और राज्यसभा में गहन चर्चा के बाद लिया गया। हम इस बात को दोहराना चाहते हैं कि संसद द्वारा पारित अन्य कानूनों की तरह यह हमारा संप्रभु निर्णय है। यह निर्णय पूरी तरह से भारत का आंतरिक निर्णय है। भारत ही नहीं कोई भी देश अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं कर सकता है।'

खुद को देखे पाकिस्तान
उन्होंने पाकिस्तान को फटकार लगाते हुए कहा कि पड़ोसी देश को कश्मीर के हालात पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उसे मानवाधिकार को लेकर खुद का रिकॉर्ड देखना चाहिए। हमें उन लोगों को बाहर करना चाहिए जो मानवाधिकारों की आड़ में दुर्भावनापूर्ण राजनीतिक एजेंडों के लिए इस मंच का दुरुपयोग कर रहे हैं। वे लोग दूसरे देशों में अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों पर बात कर रहे हैं, जबकि वे अपने ही देश में उन पर अत्याचार कर रहे हैं।' वे खुद को पीड़ित बताते हैं जबकि असलियत में वे अपराधी हैं।

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Posted By: Tanisk

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