वाशिंगटन [न्यूयॉर्क टाइम्स]। कुछ समय पहले तक लोग एटकिंस डाइट को लेना पसंद करते थे। इसमें कम कार्बोहाइड्रेट वाले भोज्य पदार्थ शामिल थे, लेकिन अब कीटोजेनिक कहे जाने वाले आहार का चलन बढ़ रहा है। इस आहार ने वैज्ञानिकों का ध्यान भी खींचा है और उन्होंने इसके संभावित फायदों और नुकसान पर चर्चा शुरू कर दी है।

एटकिंस और कीटोजेनिक डाइट में लोग अपने भोजन में ऐसे पदार्थो को शामिल करते हैं, जिसमें कार्बोहाइड्रेट नहीं होता। एटकिंस डाइट में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा समय के साथ-साथ बढ़ाई जाती है, लेकिन कीटोजेनिक डाइट में कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन की सीमा निर्धारित कर दी जाती है। एक कीटो डाइट में 10 फीसद से कम कार्बोहाइड्रेट और 20 फीसद प्रोटीन होना जरूरी है।

क्या है कीटो डाइट
कीटो डाइट या कीटोजेनिक डाइट को अपना कर आजकल कई लोग खुद को फिट रखते हैं। कीटो डाइट में कम कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं। इस डाइट से लिवर में कीटोन पैदा होता है। इसलिए इस डाइट को कीटोजेनिक डाइट, लो कार्ब डाइट या फैट डाइट जैसे नामों से भी जाना जाता है।

फैट से होता है ऊर्जा का उत्पादन
माना जाता है कि ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन से शरीर में ग्लूकोज और इंसुलिन का उत्पादन होता है। इससे शरीर में फैट जमा होने लगता है, जबकि कीटो डाइट में कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम करके फैट से ही ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है। इस प्रक्रिया को कीटोसिस कहा जाता है। इस डाइट में फैट का सेवन ज्यादा, प्रोटीन का सेवन मध्यम और कम कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें ली जाती हैं।

मधुमेह रोगियों के लिए है कारगर
कीटो आहार को सबसे ज्यादा बिकने वाली किताबों ने लोकप्रिय बना दिया है और सोशल मीडिया पर विभिन्न बीमारियों के लिए इसे एक एंटीडोट के रूप में बताया गया है। इसका प्रयोग करने वाले कहते हैं कि यह वजन घटाने का सबसे कारगर उपाय है और टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों को अपने रक्त शर्करा के स्तर में नाटकीय रूप से सुधार करने में मदद कर सकता है।

हो चुके हैं कई अध्ययन
पिछले कुछ वषों में कीटोजेनिक आहार पर कई अध्ययन हुए हैं, लेकिन अधिकांश छोटे और काफी कम अवधि के हैं। सैन फ्रांसिस्को स्थित कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता डॉ. ईथन वीस कम कार्बोहाइड्रेट वाले आहार पर संदेह जताते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले उन्होंने कीटोजेनिक आहार के साथ प्रयोग करने का फैसला किया। इस दौरान उन्होंने सुबह का नाश्ता छोड़कर ज्यादातर सलाद, नट्स, पनीर, भुनी हुई सब्जियां और ग्रिल्ड चिकन, मछली खाई, साथ ही डार्क चॉकलेट का भी सेवन किया। इसका परिणाम यह निकला कि उन्होंने काफी पैसा गंवा दिया और एक नई अलमारी भी खरीदनी पड़ी। उन्होंने कहा ‘मुझे यह बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा, क्योंकि इससे अनावश्यक खर्चा बढ़ता है।’

बढ़ती है हृदय रोगों की संभावना
कुछ डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कीटो डाइट जल्दी वजन घटाने का कारण बन सकता है, लेकिन दीर्घकालिक मामले में यह अन्य आहारों की तुलना में अधिक प्रभावी नहीं है। कुछ इसे चिंताजनक भी बताते हैं क्योंकि यह उच्च वसा वाले खाद्य पतार्थों को प्रोत्साहित करता है, जिनसे हृदय रोगों के होने की संभावना बढ़ जाती है।

ब्लड शुगर नहीं होता कंट्रोल
पिछले महीने, तीन डॉक्टरों ने जामा इंटरनल मेडिसिन में एक निबंध प्रकाशित किया था। इसमें कहा गया था कि मोटापे और मधुमेह के उपचार के रूप में आहार के प्रति जागरूकता अच्छी है, पर ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए कीटो डाइट लाभकारी नहीं है। इससे कब्ज, थकान के साथ-साथ कुछ लोगों में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल कणों में वृद्धि हो सकती है जो हृदय रोग के जोखिम का प्रमुख कारण है।

यह भी पढ़ें-
चलने का नाम ही जिंदगी है, क्योंकि गतिहीन जीवनशैली से दोगुना हो जाता है मौत का खतरा

Posted By: Amit Singh

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस