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    'ट्रंप ने संप्रभुता की सभी परंपराओं को तोड़ दिया है';अमेरिकी हमले पर विशेषज्ञ बोले- बुरी मिसाल कायम होगी

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 01:43 AM (IST)

    भारतीय सामरिक विशेषज्ञों ने शनिवार को कहा कि वेनेजुएला पर अमेरिकी हमला और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी अविश्वसनीय है। इससे एक बुरी मिसाल कायम ...और पढ़ें

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    'ट्रंप ने संप्रभुता की सभी परंपराओं को तोड़ दिया है';अमेरिकी हमले पर विशेषज्ञ बोले (फोटो- एक्स)

    पीटीआई, नई दिल्लीभारतीय सामरिक विशेषज्ञों ने शनिवार को कहा कि वेनेजुएला पर अमेरिकी हमला और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी अविश्वसनीय है। इससे एक बुरी मिसाल कायम होगी, क्योंकि अन्य शक्तियां अमेरिकी कदम का हवाला देते हुए भविष्य में इसी तरह की कार्रवाई करने की कोशिश कर सकती हैं। उन्होंने इसे डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा उठाया गया बेहद खतरनाक और आक्रामक कदम भी बताया।

    पूर्व राजनयिक और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ राजीव डोगरा ने कहा कि सच कहूं तो यह अविश्वसनीय है। अभी तक विश्वास नहीं हो रहा है, क्योंकि हाल के समय में यह अभूतपूर्व है।

    पिछली शताब्दियों में ऐसा हुआ होगा, जब कोई किसी देश पर आक्रमण करता था, उन देशों के नेताओं को बंदी बना लेता था या उनकी हत्या कर देता था। हाल के समय में हमने किसी भी देश को कानून, रीति-रिवाज या तर्क की इतनी अवहेलना करते हुए नहीं सुना है।

    ट्रंप ने संप्रभुता की सभी परंपराओं को तोड़ दिया है। वेनेजुएला के लोग राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पसंद करते हैं या नहीं, यह एक अलग बात है। इसका फैसला वेनेजुएला के लोगों को करना है। ट्रंप द्वारा अपनी सेना को मादुरो को हटाने का आदेश देना बिलकुल तर्कसंगत नहीं है।

    डोगरा ने कहा-मुझे नहीं लगता कि इस हमले को अमेरिकी सीनेट, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा या अमेरिकी कानून द्वारा वैध ठहराया गया है। यह एक बहुत ही गलत मिसाल कायम करेगा, क्योंकि इसी तरह के अशांत स्वभाव वाले कुछ अन्य देश भी इसका अनुसरण कर सकते हैं। कोई भी देश कल आसानी से कह सकता है कि अगर अमेरिका वेनेजुएला में ऐसा कर सकता है, तो वह किसी अन्य देश या किसी अन्य स्थान पर ऐसा क्यों नहीं कर सकता।

    सामरिक मामलों के एक अन्य विशेषज्ञ सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर राहुल के. भोंसले ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने एक बेहद खतरनाक और आक्रामक कदम उठाया है। हमें देखना होगा कि इसका क्या परिणाम होता है।

    अमेरिकी प्रशासन और मादुरो प्रशासन के बीच तनाव काफी समय से पनप रहा था। यह तनाव जो बाइडन के शासनकाल में भी मौजूद था। लेकिन, ट्रंप प्रशासन ने विशेष रूप से आक्रामक रुख अपनाया है। यह भी देखना होगा कि मादुरो की सरकार अमेरिका की सैन्य विरोधी नहीं थी।