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    हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की काट के लिए ट्रंप की नीति पर ही आगे बढ़ेगा बाइडन प्रशासन, क्वाड समूह को देगा मजबूती

    By Krishna Bihari SinghEdited By:
    Updated: Sun, 31 Jan 2021 12:31 AM (IST)

    बाइडन प्रशासन क्वाड समूह को एक ऐसा आधार मानता है जिस पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र के संदर्भ में अमेरिकी नीति को तैयार किया जा सकत ...और पढ़ें

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    अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा है कि अमेरिका 'क्वाड' की प्रगति के लिए काम करेगा।

    वाशिंगटन, एजेंसियां। बाइडन प्रशासन क्वाड समूह को एक ऐसा आधार मानता है जिस पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र के संदर्भ में अमेरिकी नीति को तैयार किया जा सकता है। यह बात राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने शुक्रवार को कही। वे संसद द्वारा वित्त पोषित थिंक टैंक यूएस इंस्टीट्यूट ऑफ पीस द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अमेरिका चार देशों के क्वाड समूह को आगे बढ़ाएगा।इस संकेत से साफ है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता को अमेरिका कतई बर्दाश्‍त करने के मूड में नहीं है। 

    'क्वाड' की प्रगति के लिए करेंगे काम

    राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा कि अमेरिका चार देशों के समूह 'क्वाड' की प्रगति के लिए काम करेगा। हम इसे आगे बढ़ाना चाहते हैं। यह एक ऐसी प्रणाली है जिसे हम एक ऐसी बुनियाद के रूप में देखते हैं जिसके जरिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण अमेरिकी नीति का निर्माण किया जा सकता है। सुलिवन ने यह भी कहा कि बाइडन प्रशासन भी 'क्वाड' और पूर्ववर्ती ट्रंप प्रशासन की हिंद-प्रशांत नीति पर आगे भी काम करेगा।

    जारी रहेगी हिंद-प्रशांत नीति

    राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की हिंद-प्रशांत नीति ऐसी पहल हैं जो जारी रहेंगी। अमेरिकी एनएसए ने साफ कहा कि पूर्ववर्ती प्रशासन ने जो कदम उठाए थे उनको आगे बढ़ाने और उसे अमल में लाने के प्रयास किए जाएंगे। मालूम हो कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने क्वाड को आकार दिया था।

    भारत के साथ साझा चुनौतियों पर हुई बात

    वहीं हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका को रेखांकित करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि वह पहले से ही महत्वपूर्ण साझेदार है। अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर के साथ टेलीफोन पर हुई पहली बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने नए अवसरों का बेहतर तरीके से लाभ उठाने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र और उससे भी परे नए अवसरों और रक्षा संबंधी साझा चुनौतियों से निपटने के तरीकों पर चर्चा की।

    कई गंभीर मसलों पर हुई बात

    बता दें कि अमेरिका में शीर्ष राजनयिक का पदभार संभालने के बाद विदेश मंत्री ब्लिंकन की एस जयशंकर के साथ टेलीफोन पर पहली बातचीत है। विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने शुक्रवार को कहा कि भारत और अमेरिका के मंत्रियों ने कोरोना टीकाकरण के प्रयासों, क्षेत्रीय विकास, द्विपक्षीय संबंधों को और विस्तार देने के लिए उठाए जा सकने वाले कदमों तथा आपसी चिंता के अन्य मुद्दों पर चर्चा की।

    भारत भी अमेरिका के साथ काम करने को तैयार

    वहीं भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि जयशंकर और ब्लिंकन ने बहुपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और उसे विस्तार देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है। गौरतलब है कि विदेश मंत्री के रूप में कामकाज संभालने के बाद से ब्लिंकन ने कनाडा, मैक्सिको, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जापान, जर्मनी, फ्रांस, इजराइल और दक्षिण अफ्रीका समेत एक दर्जन से अधिक देशों के अपने समकक्षों से बात की है। 

    अमेरिकी सेना ने भी खोला मोर्चा 

    वहीं समाचार एजेंसी रायटर के मुताबिक अमेरिकी सेना ने भी दक्षिणी चीन सागर में पिछले हफ्ते चीनी सैन्य विमानों की उड़ानों पर सवाल उठाए हैं। अमेरिकी सेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि ये उड़ानें बीजिंग के आक्रामक व्यवहार के अनुरूप है। समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक अमेरिका ने विवादित दक्षिण चीन सागर में सैन्य गतिविधियों के लिए चीन को फटकार लगाते हुए कहा कि उसका ये कदम क्षेत्र को अस्थिर करने वाला है।