वाशिंगटन, एएनआइ। सऊदी अरब की नामचीन तेल प्रसंस्करण कंपनी अरामको के दो प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमले के बाद सभी देशों में खलबली मच चुकी है। ऐसे में अमेरिका की तरफ से बयान आया है कि वह इस स्थिति में अपने आपातकालीन तेल का उपयोग करेंगे। ड्रोन हमले के बाद से सभी देशों तेल के लिए काफी परेशान हो गए हैं, जिसको ध्यान में रखते हुए अमेरिका ने इस प्रकार का फैसला किया है।

अमेरिका राष्ट्रपति कि तरफ से आए बयान में गया है कि साऊदी में हुए ड्रोन हमले के बाद से तेल के मूल्य में प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में अमेरिका पहले ही सतर्क हो गया है। उनकी तरफ से आए संकेत में भी कहा गया है कि अगर मार्केट में तेल निर्यात करना पड़ा तो उसके लिए भी वह तैयार हैं।

अमेरिका में मौजूद है strategic petroleum reserve
इसके अलावा उन्होंने कहा कि उन्होंने सभी एजेंसियों को सूचना दे दी है कि वह इस संदर्भ में काम करना जल्द शुरू कर देंगे। आपको बता दें कि अमेरिका में strategic petroleum reserve नाम से ईंधन रखने की जगह है। जो अमेरिका में मौजूद है। यह दुनिया की सबसे बड़ी तेल भंडारण स्थान है। इसकी स्थपना 1970 में हुई थी। वर्ष 1991 में जो गल्फ वॉर के दौरान इसका इस्तेमाल किया गया है था।

हाउती ने ली थी ड्रोन की जिम्मेदारी
सऊदी की नामचीन तेल कंपनी पर हमले की जिम्मेदार ईरान समर्थित यमन के हाउती विद्रोहियों ने ली थी। इस हमले के बाद से क्षेत्र में काफी तनाव बढ़ गया है। बता दें कि ये हमला शनिवार को हुए था। इस हमले के बाद दोनों कंपनियों में आग लग गई थी, इसमें किसी के भी हताहत होने की खबर नहीं थी। ऐसे में इस पूरे मामले की जांच भी की जा रही है।

अमेरिका ने ड्रोन हमले के लिए ईरान को बताया जिम्मेदार
पिछले दिनों अमेरिका ने अरामको में हुए ड्रोन हमले का दोषी ईरान को ठहराया था, हालांकि ईरान की तरफ से इन सभी आरोपों को खारिज किया गया है।

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Posted By: Pooja Singh

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