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    SIR पर सियासत : छह से अधिक बच्चे और 15 साल में पिता बनने वाले 1.20 लाख वोटर अब आयोग के रडार पर

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 10:18 PM (IST)

    पश्चिम मेदिनीपुर जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। करीब 1.20 लाख मतदाताओं को तथ्यात्मक असंगतियों के आध ...और पढ़ें

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    फाइल फाेटो।

    जागरण संवाददाता, खड़गपुर। पश्चिम मेदिनीपुर जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। चुनाव आयोग के निर्देश पर चल रही इस प्रक्रिया के तहत तथ्यात्मक असंगतियों (लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी) के आधार पर जिले के करीब 1 लाख 20 हजार मतदाताओं को सुनवाई के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। 
     
    इन मामलों की सुनवाई जनवरी के दूसरे सप्ताह से शुरू होगी। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिला प्रशासक बिजिन कृष्ण ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जा रही है। 
     
    उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में प्रारंभिक जांच के बाद बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) संतुष्ट नहीं हुए हैं, उन्हीं मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
     
    सूत्रों के अनुसार, एनुमरेशन फॉर्म में पाई गई असंगतियों के आधार पर नोटिस तैयार किए गए हैं और उनका वितरण भी शुरू हो चुका है। आंकड़ों के मुताबिक, मेदिनीपुर सदर क्षेत्र में करीब 3,500, गरबेटा में 7,500, शालबनी में 7,500 और केशपुर में लगभग 8,500 मतदाताओं को नोटिस भेजे जा रहे हैं। 
     
    शुरुआती चरण में ‘प्रोजेनी मैपिंग’ के तहत एक ही पिता के नाम पर छह से अधिक संतानों वाले मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है। जिले में मतदाताओं की संख्या करीब 40 लाख 15 हजार थी। 

    एसआईआर के पहले चरण में 38 लाख 12 हजार फॉर्म जमा किए गए, जबकि 2 लाख 3 हजार फॉर्म जमा नहीं हो सके। इन फॉर्मों में से करीब 7.5 लाख मामलों में प्रारंभिक असंगति पाई गई थी, जिनकी दोबारा जांच के निर्देश दिए गए। 
     
    इसके अलावा, ‘नो मैपिंग’ श्रेणी में लगभग 65 हजार मतदाता चिह्नित किए गए हैं। असंगतियों में छह से अधिक संतान वाले करीब 71 हजार मामले, 15 वर्ष से कम उम्र में पिता बनने, तथा दादा-दादी और पोते-पोतियों के बीच 40 वर्ष से कम उम्र के अंतर जैसे तथ्य शामिल हैं।
     
    निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार, सुनवाई के दौरान यदि मतदाता संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं, तो उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में बरकरार रहेगा।
     
    इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस नेता दीनेन राय ने ड्राफ्ट सूची के तुरंत बाद इतनी बड़ी संख्या में असंगतियां सामने आने पर सवाल उठाए हैं। 
     
    वहीं भाजपा जिला महासचिव शुभजीत राय ने कहा कि एसआईआर से फर्जी मतदाताओं की पहचान होगी और इसी वजह से तृणमूल असहज है।चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि कई मामलों में असंगतियां सामान्य त्रुटियां हो सकती हैं, लेकिन जानबूझकर गलत जानकारी देने के मामलों की गहन जांच आवश्यक है। यह पूरी प्रक्रिया 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।