तस्लीमा नसरीन का बंगाल सरकार पर बड़ा आरोप, कहा- रंगमंच महोत्सव से 'लज्जा' नाटक को जबरन हटाया
तस्लीमा नसरीन ने एक पोस्ट में बंगाल सरकार पर कलाकारों तथा लेखकों की आवाज दबाने का आरोप लगाया और दावा किया कि उनके उपन्यास पर आधारित नाटक लज्जा को राज्य में दो रंगमंच महोत्सवों में जबरन रद कर दिया गया। नसरीन ने कहा कि मुझे इस आशंका के साथ बंगाल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था कि मेरी उपस्थिति कट्टरपंथी लोगों को दंगे भड़काने के लिए उकसाएगी।
राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने एक पोस्ट में बंगाल सरकार पर कलाकारों तथा लेखकों की आवाज दबाने का आरोप लगाया और दावा किया कि उनके उपन्यास पर आधारित नाटक 'लज्जा' को राज्य में दो रंगमंच महोत्सवों में जबरन रद कर दिया गया।
नसरीन ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उत्तर 24 परगना में गोबरडांगा नाट्योत्सव तथा हुगली में पांडुआ नाट्योत्सव में हस्तक्षेप किया और आयोजकों पर कार्यक्रम से नाटक हटाने का दबाव बनाया, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे सांप्रदायिक दंगे भड़क सकते हैं।
पुलिस अधिकारियों ने तस्लीमा के दावों को खारिज किया
वहीं हुगली (ग्रामीण) और बारासात पुलिस जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तस्लीमा के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि यह क्लब अधिकारियों का फैसला है। पुलिस प्रशासन का इससे कोई लेना-देना नहीं है।
नसरीन ने कहा कि मुझे इस आशंका के साथ बंगाल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था कि मेरी उपस्थिति कट्टरपंथी लोगों को दंगे भड़काने के लिए उकसाएगी। मैं समझ नहीं पा रही हूं कि दंगाइयों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
इधर गोबरडांगा रंगमंच महोत्सव के आयोजकों ने पुष्टि की है कि 'लज्जा' को सूची से हटा दिया गया है, लेकिन उन्होंने कोई कारण बताने से इनकार कर दिया।
केंद्रीय मंत्री ने ममता पर पाखंड का आरोप लगाया
भाजपा ने नसरीन के दावों का समर्थन किया और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने मुख्यमंत्री ममता पर पाखंड का आरोप लगाया। मजूमदार ने कहा कि बांग्लादेश के कट्टरपंथियों और बंगाल की मुख्यमंत्री के बीच जो थोड़ा बहुत अंतर था, वह भी समाप्त हो गया है। वह कट्टरपंथ के खिलाफ लोकप्रिय नाटक की अनुमति दंगे भड़कने के डर से नहीं दे रही हैं।
भाजपा आइटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने पोस्ट किया कि अगर ममता बंगाल में कानून-व्यवस्था को संभालने में असमर्थ हैं और मुस्लिमों को लेकर इतनी भयभीत हैं कि कला, संस्कृति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को भी दबाया जा रहा है, तो उन्हें पद छोड़ने पर विचार करना चाहिए।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।