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    Kolkata: बंगालियों पर टिप्पणी मामले में परेश रावल को कलकत्ता हाई कोर्ट से मिली राहत, छह फरवरी को अगली सुनवाई

    By Jagran NewsEdited By: Devshanker Chovdhary
    Updated: Thu, 02 Feb 2023 11:30 PM (IST)

    भाजपा नेता और बॉलीवुड अभिनेता परेश रावल को कलकत्ता हाई कोर्ट से गुरुवार को राहत मिल गई। बीते साल गुजरात चुनाव के दौरान एक रैली में एक्टर ने बंगालियों को लेकर एक टिप्पणी कर दी थी। हालांकि बाद में उन्होंने माफी भी मांग लगी थी। File Photo

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    बंगालियों पर टिप्पणी मामले में परेश रावल को कलकत्ता हाई कोर्ट से मिली राहत।

    राज्य ब्यूरो, कोलकाता। भाजपा नेता और बॉलीवुड अभिनेता परेश रावल को कलकत्ता हाई कोर्ट से गुरुवार को राहत मिल गई। बीते साल गुजरात चुनाव के दौरान एक रैली में एक्टर ने बंगालियों को लेकर एक टिप्पणी कर दी थी। हालांकि, बाद में उन्होंने माफी भी मांग लगी थी, लेकिन परेश रावल की कथित 'बंगाली विरोधी टिप्पणी' के खिलाफ बंगाल माकपा के सचिव मोहम्मद सलीम ने कोलकाता में एफआइआर दर्ज करा दी थी।

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    छह फरवरी को अगली सुनवाई 

    इसके बाद, कोलकाता के तालतला थाने की पुलिस ने उन्हें समन जारी कर पूछताछ के लिए 12 दिसंबर को दोपहर दो बजे तलब किया गया था, लेकिन वे हाजिर नहीं हुए थे और समय मांग ली थी। उसी एफआईआर के खिलाफ अभिनेता की ओर से कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिस पर सुनवाई के बाद जज ने आदेश दिया है कि कोलकाता पुलिस द्वारा बॉलीवुड अभिनेता परेश रावल के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जा सकती है और उनसे वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूछताछ की जा सकती है। सुनवाई की अगली तिथि छह फरवरी की तय की गई है।

    बंगालियों को लेकर की थी विवादित टिप्पणी

    बता दें कि 2022 के गुजरात चुनाव में रावल ने कहा था कि गैस सिलेंडर महंगा है, लेकिन कीमतें नीचे आ जाएंगी। लोगों को रोजगार भी मिलेगा लेकिन क्या होगा अगर रोहिंग्या घुसपैठिये और बांग्लादेशी दिल्ली की तरह आपके आसपास रहने लगे? आप क्या करेंगे? गैस सिलेंडर के साथ? बंगालियों के लिए मछली पकाओगे?

    परेश रावल ने मांगी थी माफी

    आपको बता दें कि, उनके इस कमेंट से देश भर में आलोचना हुई थी, इसके बाद उन्होंने ट्विटर पर माफी मांग ली थी। रावल ने बाद में कहा कि उनका यह बयान अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं के संदर्भ में था। इन सब के बाद परेश के खिलाफ धारा 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना), 153A (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 153B (भाषाई या नस्लीय समूहों के अधिकारों से वंचित करना), 504 (भड़काने के इरादे से जानबूझकर अपमान) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

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