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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 11, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

राष्‍ट्रपति चुनाव के लिए ममता बनर्जी ने दिल्ली में बुलाई बैठक, सोनिया गांधी समेत 22 दलों के नेताओं को न्योता

By Sumita JaiswalEdited By:
Published: Sat, 11 Jun 2022 04:57 PM (IST)Updated: Sat, 11 Jun 2022 05:12 PM (IST)

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अगले महीने होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को देखते हुए एक बार फिर विपक्ष को ...और पढ़ें

राष्ट्रपति चुनाव को देखते हुए ममता बनर्जी ने फिर शुरू की विपक्ष को लामबंद करने की कवायद ।
राष्ट्रपति चुनाव को देखते हुए ममता बनर्जी ने फिर शुरू की विपक्ष को लामबंद करने की कवायद ।

कोलकाता, राज्य ब्यूरो। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अगले महीने होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को देखते हुए एक बार फिर विपक्ष को लामबंद करने की कवायद शुरू की है। ममता ने इस बाबत सोनिया गांधी समेत 22 विरोधी राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं को पत्र लिखा है। उन्हें आगे की रणनीति तैयार करने के लिए 15 जून को दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। इनमें गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हैं।

आमंत्रित जनों में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन, ओडि़शा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, भाकपा के राष्ट्रीय महासचिव डी राजा, माकपा के राष्ट्रीय महासचिव सीताराम येचुरी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार, राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी, कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, राज्यसभा सांसद एचडी देवगौड़ा, जम्मू कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूख अब्दुल्ला, पीडीपी की अध्यक्ष मेहबूबा मुफ्ती, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के अध्यक्ष पवन चामलिंग, और आइयूएमएल के अध्यक्ष केएम कादेर मोहिदीन शामिल हैं।

ममता ने लिखा

पत्र में ममता ने लिखा है- 'जबर्दस्त लोकतांत्रिक चरित्र वाले देश को मजबूत और प्रभावशाली विपक्ष की जरुरत है। सभी प्रगतिशील बलोंं को एकजुट होकर विभाजनकारी ताकत का प्रतिरोध करना होगा। विभिन्न केंद्रीय एजेंसियां विपक्षी नेताओं को लगातार निशाना बना रही हैं। हमें अपना प्रतिरोध मजबूत करना होगा। राष्ट्रपति चुनाव नजदीक है। यह सभी प्रगतिशील विपक्षी दलों के लिए साथ मिलकर भारतीय राजनीति के भविष्य की योजना को लेकर विचार-विमर्श करने का उपयुक्त समय है। ऐसे समय जब हमारा संविधान संकट के दौर से गुजर रहा है, विरोधी आवाज को एकजुट करना समय की जरुरत है।' इससे पहले 2012 व 2017 के राष्ट्रपति चुनाव के समय भी ममता ने विरोधी दलों को लामबंद करने की कोशिश की थी, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिल पाई थी।

कांग्रेस को ज्यादा महत्व नहीं दे रही तृणमूल

ममता ने सोनिया गांधी को भले बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया हो लेकिन उनकी पार्टी कांग्रेस को ज्यादा महत्व नहीं दे रही। इसका इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि तृणमूल की तरफ से आमंत्रित नेताओं की जो सूची जारी की गई है, उनमें सोनिया का नाम नौवें स्थान पर है जबकि पहले स्थान पर आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का नाम है।