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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 02, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Mahalaya 2024: बंगाल में आज महालया पर्व, पितरों का होगा तर्पण; नवरात्रि की होगी शुरूआत

Published: Wed, 02 Oct 2024 08:59 AM (IST)Updated: Wed, 02 Oct 2024 09:20 AM (IST)

पश्चिम बंगाल और असम में धूमधाम से महालया पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व भव्य दुर्गा पूजा उत्सव की ...और पढ़ें

Mahalaya 2024: पश्चिम बंगाल में महालया पर्व आज।
Mahalaya 2024: पश्चिम बंगाल में महालया पर्व आज।

HighLights

  1. पश्चिम बंगाल में महालया का विशेष महत्व।
  2. इसी दिन से पितृपक्ष भी होते हैं समाप्त।
  3. गंगा में स्नान और पितरों का होता है तर्पण।

डिजिटल डेस्क, कोलकाता। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा नवरात्रि से एक दिन पहले महालया पर्व से शुरू होती है। इस बार 3 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरूआत हो रही है। मगर पश्चिम बंगाल में आज यानी दो अक्टूबर से इसकी शुरूआत हो जाएगी। बंगाल में पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन महालया पर्व मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इसका काफी महत्व है। पितृपक्ष और नवरात्रि के संधिकाल को महालया के नाम से जाना जाता है।

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मां दुर्गा की प्रतिमा को दिया जाता अंतिम रूप

महालया पर्व का पश्चिम बंगाल में नवरात्रि जैसा महत्व है। सुबह चार बजे लोग चंडी पाठ सुनते हैं। इसका प्रसारण रेडियो पर किया जाता है। लोग मां दुर्गा के घर आगमन की वंदना करते हैं। वहीं गंगा नदी में स्नान के बाद पितरों का तर्पण करते हैं। पितरों के तर्पण के बाद लोग दुर्गा पूजा की तैयारी में जुट जाते हैं। महालया के दिन ही मां दुर्गा की प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जाता है।

मूर्तिकार करते हैं चक्षुदान

महालया के दिन ही सबसे वरिष्ठ मूर्तिकार मां दुर्गा की आंखों को आकार देता है। उन पर रंग चढ़ाया जाता है। इसके बाद प्रतिमा को जीवंत रूप में पंडालों में सजाया जाता है। प्रतिमा में नेत्र बनाने की परंपरा को चक्षुदान कहा जाता है। इसी के साथ बंगाल में नवरात्रि की शुरूआत हो जाती है। मान्यता के मुताबिक महालया के दिन ही देवताओं ने महिषासुर राक्षस के अंत का आह्वान मां दुर्गा से किया था। महालया पितृपक्ष के आखिरी दिन होने की वजह से इसे सर्वपितृ अमावस्या भी कहा जाता है।

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