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    बंगाल में शिक्षा मंत्री के बयान पर विवाद, अंतरिम कुलपतियों को 'गुलाम' कहने से भड़के धर्मेंद्र प्रधान

    By Jagran NewsEdited By: Achyut Kumar
    Updated: Sat, 16 Sep 2023 04:32 PM (IST)

    बंगाल में नया विवाद पैदा हो गया है। राज्य के शिक्षा मंत्री ने अंतरिम कुलपतियों को गुलाम बताया है जिस पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि बंगाल के शिक्षा मंत्री शिक्षित व्यक्ति हैं। शिक्षा मंत्री को इस प्रकार के शब्द का प्रयोग करना शोभा नहीं देता। इस तरह की भाषा के प्रयोग का मतलब राज्य और यहां की सभ्यता का अपमान करना है

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    बंगाल में नया विवाद, राज्य के शिक्षा मंत्री ने अंतरिम कुलपतियों को कहा गुलाम

    कोलकाता, राज्य ब्यूरो। बंगाल में राजभवन-राज्य सचिवालय के बीच टकराव को लेकर एक नया विवाद पैदा हो गया है, जब शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने राज्यपाल सीवी आनंद बोस द्वारा नियुक्त अंतरिम कुलपतियों को ‘गुलाम‘ बताया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ब्रात्य बसु के बयान की कड़ी निंदा की। बसु ने उनसे मुलाकात करने आए राज्य के पांच विश्वविद्यालय के अंतरिम कुलपतियों को 'गुलाम' कहा है।

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    'शिक्षा मंत्री को ऐसे शब्द का प्रयोग करना शोभा नहीं देता'

    धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि बंगाल के शिक्षा मंत्री शिक्षित व्यक्ति हैं। शिक्षा मंत्री को इस प्रकार के शब्द का प्रयोग करना शोभा नहीं देता। इस तरह की भाषा के प्रयोग का मतलब राज्य और यहां की सभ्यता का अपमान करना है।

    शिक्षा मंत्री का बयान दुर्भाग्यपूर्ण

    दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल कालेज टीचर्स एसोसिएशन के महासचिव केशब भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य के एक मंत्री की ऐसी टिप्पणियां उनकी खराब अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि यह और भी दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि राज्य के शिक्षा मंत्री खुद एक कालेज शिक्षक है।

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    इस टिप्पणी की आलोचना करते हुए जादवपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के महासचिव पार्थ प्रतिम राय ने कहा कि मंत्री ने न केवल कुलपतियों का, बल्कि राज्य के पूरे शैक्षणिक समुदाय का अपमान किया है।

    अकादमिक जगत की सामाजिक प्रतिष्ठा को हुआ नुकसान

    अर्थशास्त्र के शिक्षक पीके मुखोपाध्याय ने कहा कि बसु को उनकी टिप्पणी के आधार पर अदालत में भी ले जाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणी से न केवल अंतरिम कुलपतियों, जिन्हें उन्होंने निशाना बनाया, बल्कि राज्य के पूरे अकादमिक जगत की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान होता है।

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    अपने रुख पर अड़े बसु

    व्यापक आलोचनाओं के बावजूद बसु अपने रुख पर अड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि मैंने यह बात एक राजनेता के तौर पर कही है, न कि राज्य के शिक्षा मंत्री के तौर पर। मैंने जो कहा है वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और हमारी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बारे में इस्तेमाल की जा रही भाषा और विशेषणों की तुलना में कुछ भी नहीं है। अब इस मामले में विवाद या बहस शुरू करना किसी की भी स्वतंत्रता है।