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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 09, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

लॉकडाउन में सब्जियां बेचकर दलवीर ने कमाये डेढ़ लाख, युवाओं को सिखा रहे कृषि के गुर

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Published: Thu, 09 Jul 2020 03:00 AM (IST)Updated: Thu, 09 Jul 2020 12:14 PM (IST)

लॉकडाउन ने भले ही जनसामान्य की मुश्किलें बढ़ी लेकिन इसी दौरान आत्मनिर्भर बनने की राह भी निकली। उत्तरकाशी जिले के ...और पढ़ें

लॉकडाउन में सब्जियां बेचकर दलवीर ने कमाये डेढ़ लाख, युवाओं को सिखा रहे कृषि के गुर
लॉकडाउन में सब्जियां बेचकर दलवीर ने कमाये डेढ़ लाख, युवाओं को सिखा रहे कृषि के गुर

उत्तरकाशी, शैलेंद्र गोदियाल। लॉकडाउन ने भले ही जनसामान्य की मुश्किलें बढ़ाई हों, लेकिन इसी के बीच से आत्मनिर्भर बनने की राह भी निकली है। इसकी बानगी पेश कर रहे हैं उत्तरकाशी जिले के ग्राम कंकराड़ी निवासी दलवीर सिंह चौहान। उन्होंने लॉकडाउन की अवधि में अपनी ढलानदार असिंचित भूमि को न केवल उर्वरा बनाया, बल्कि इस भूमि पर उगी सब्जियों को बेचकर 1.5 लाख की कमाई भी की। दलवीर से प्रेरणा लेकर अब पास के गांव के दो युवा भी उनसे आधुनिक ढंग सब्जी उत्पादन के गुर सीख रहे हैं।

दलवीर ने वर्ष 1994 में गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर से अर्थशास्त्र में एमए करने के बाद वर्ष 1996 में बीएड किया। सामान्य किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले दलवीर पर भाई-बहनों में सबसे बड़ा होने के कारण परिवार चलाने की जिम्मेदारी भी थी। इसलिए उन्होंने गांव के निकट मुस्टिकसौड़ में एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया। 

स्कूल से मिलने वाला मानदेय परिवार चलाने के लिए नाकाफी था। सो, दलवीर ने खेती-किसानी में हाथ आजमाने का निर्णय लिया। सबसे बड़ी चुनौती असिंचित भूमि में पानी पहुंचाने की थी। इसके लिए दलवीर ने वर्ष 2008 में विधायक निधि की एक लाख की राशि से दो किमी लंबी पानी की लाइन मुस्टिकसौड़ के एक स्रोत से जोड़ी। हालांकि, वहां भी पानी पर्याप्त नहीं था। इसलिए घर के पास ही एक टैंक बनाया गया।

अब उन्होंने टपक सिंचाई से सब्जी उत्पादन का फैसला किया। इसके लिए सिस्टम लगाने में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने उनकी मदद की। नतीजा, असिंचित भूमि सोना उगलने लगी। इसके बाद वर्ष 2011 में दलवीर ने माइक्रो स्प्रिंकलर सिंचाई की तकनीक भी सीखी और फिर प्राइवेट स्कूल की नौकरी छोड़कर पूरी तरह खेती-किसानी में तल्लीन हो गए। 

उन्होंने बेमौसमी सब्जी उत्पादन के लिए पॉली हाउस भी बनाया। इसकी परिणति यह हुई कि आज दलवीर उत्तरकाशी जिले के प्रगतिशील किसानों में शामिल हो गए हैं। दलवीर बताते हैं कि इस सीजन में मार्च से लेकर जून आखिर तक वो 1.5 लाख रुपये की सब्जी बेच चुके हैं। मस्ताड़ी निवासी जयवीर और शेरपुरा निवासी राजेंद्र ने बताया कि दलवीर की प्रेरणा से उन्होंने भी अपने गांवों में सब्जी उत्पादन के लिए पॉलीहाउस लगा दिए हैं।

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इन सब्जियों का कर रहे उत्पादन

ब्रोकली, टमाटर, आलू, छप्पन कद्दू, शिमला मिर्च, पत्ता गोभी, बैंगन, फ्रासबीन, फूल गोभी, राई, खीरा, पहाड़ी ककड़ी, पहाड़ी कद्दू आदि।

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