उत्तरकाशी, [जेएनएन]: उत्तरकाशी से 135 किलोमीटर दूर भारत-चीन सीमा पर सोनम नदी में बनी झील से सरकारी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) और सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अनुसार 27 जुलाई को क्षेत्र में बादल फटने के कारण पहाड़ से हुए भूस्खलन का मलबा गिरने से सोनम नदी का बहाव रुक गया था, हालांकि तब झील छोटी थी। इसके बाद लगातार हो रहे भूस्खलन ने हालात को गंभीर बना दिया, लेकिन प्रशासन को इसका पता रविवार चार सितंबर को चला।

दूसरी ओर, जिलाधिकारी दीपेंद्र चौधरी के निर्देश के बाद भटवाड़ी के उपजिलाधिकारी वीएन शुक्ल के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों का एक दल झील का मुआयना करने मौके पर गया है। दल के देर शाम उत्तरकाशी लौटने की संभावना है।

उत्तरकाशी के जिलाधिकारी दीपेंद्र चौधरी ने स्वीकार किया कि सूचना मिलने में विलंब हुआ है। उन्होंने बताया कि उन्हें रविवार को पहली सूचना स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआइयू) से मिली। डीएम ने बताया कि इस बारे में आइटीबीपी और बीआरओ को पहले पता चल चुका था। डीएम ने कहा कि उन्होंने तत्काल एसडीएम के नेतृत्व में एक साठ सदस्यीय दल मौके के लिए रवाना कर दिया है।

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दल में जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता, गंगोत्री नेशनल पार्क के रेंज अधिकारी के साथ ही सीपीडब्ल्यूडी के विशेषज्ञ और एसडीआरएफ के जवान शामिल हैं। उन्होंने कहा कि 80 मीटर लंबी , 70 मीटर चौड़ी तथा तीन मीटर गहरी झील से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है। हालात नियंत्रण में हैं और घबराने जैसी बात नहीं है। जिलाधिकारी ने बताया कि झील से पानी की निकासी जरूरी है, वरना अगले मानसून में यह खतरा बन सकती है।

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सीमा पर सड़क निर्माण कर रही केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के पास सभी जरूरी उपकरण मौजूद हैं। आवश्यकता पड़ने पर नदी के बहाव में अवरोधक बने मलबे को हटाया जाएगा। दरअसल झील से उत्तरकाशी के भटवाड़ी ब्लाक के तटीय गांवों के लिए खतरा बना हुआ है। उधर, आइटीबीपी की 12वीं वाहिनी के कमांडिंग अफसर केदार ङ्क्षसह रावत ने भी माना कि झील 27 जुलाई को ही बन गई थी। उन्होंने इससे ज्यादा कुछ भी कहने से इन्कार किया।

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तब बीआरओ का पुल हुआ था क्षतिग्रस्त

सीमा सड़क संगठन के कमांडर एससी लूनिया ने खुलासा किया कि 27 जुलाई को बादल फटने से सोनम नदी उफान पर थी। उस दिन आई बाढ़ से बीआरओ के वैली ब्रिज के स्टील गार्डर भी बहे थे। उन्होंने बताया कि इस बीच पहाड़ से हुए भूस्खलन का मलबा भारी मात्रा में नदी में जा समाया, जिससे झील बन गई।

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Edited By: sunil negi