जागरण संवाददाता, उत्तरकाशी। Makar Sankranti 2021 मकर संक्रांति के पावन पर्व पर सैकड़ों श्रद्धालुओं और देव डोलियों ने गंगा (भागीरथी) में आस्था की डुबकी लगाई। पूजा अर्चना के बीच श्रद्धालुओं ने मंदिरों में जलाभिषेक किया। भागीरथी का हाड कंपा देने वाला बर्फीला पानी भी श्रद्धालुओं के उत्साह को ठंडा नहीं कर पाया है। क्या बच्चे, क्या बूढ़े और क्या जवान, मकर संक्रांति के पावन पर्व पर आस्था की डुबकी लगाने में कोई भी पीछे नहीं रहा। गुरुवार की तड़के से उत्तरकाशी में गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। दर्जनों देव डोलियों की मौजूदगी, ढोल-नगाड़ों की आवाज और मां गंगा के जयकारों से नगर का माहौल भक्तिमय हो गया। मकर संक्रांति के स्नान को लेकर लोगों में खासा उत्साह दिखा। टिहरी और दूरदराज क्षेत्रों से बुधवार से ही देव डोलियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था।

उत्तरकाशी के पौराणिक मणिकर्णिका, जड़भरत, गंगोरी, केदार, लक्षेश्वर आदि स्नान घाटों पर गुरुवार तड़के ढाई बजे से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़नी शुरू हुई। स्नान पर्व पर धनारी क्षेत्र से नागराजा, चंदणनाग, नागणी देवी, रनाड़ी के कचड़ू देवता, डुंडा की रिंगाली देवी, गाजणा क्षेत्र से भैरव, चौरंगी नाथ, नागराजा, बरसाली के नागराजा, रेणुका देवी, चिन्यालीसौड़ की राजराजेश्वरी, टिहरी से सुरकंडा देवी आदि दर्जनों देवी-देवताओं की डोलियां, ढोल, निशान आदि के साथ हजारों श्रद्धालु उत्तरकाशी पहुंचे हैं। स्नान घाटों और नगर के काशी विश्वनाथ मंदिर सहित तमाम मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा है।

बाड़ाहाट क्षेत्र के आराध्य कंडार देवता, बाड़ागड्डी के हरिमहाराज, खंडद्वारी माता, कैलापीर, नाग देवता, बाल कंडार आज दिन में स्नान के लिए आएंगे। वहीं सुबह के दौरान गायत्री परिवार एवं साईं मंदिर समिति की ओर से मणिकर्णिका घाट पर श्रद्धालुओं के लिए निश्‍शुल्क चाय की व्यवस्था की गई।  ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेश शास्त्री भट्ट ने बताया कि मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण होकर मकर राशि में प्रवेश करता है, लिहाजा सभी शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान तथा दान पुण्य का विशेष महत्व होता है।

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Edited By: Sunil Negi